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‘बंद और पत्थरबाजी के दिन गए’, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बोले- अब स्टार्टअप्स और नए अवसरों के लिए चर्चा में जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश में बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश में बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके मुताबिक, अब जम्मू-कश्मीर बंद और पत्थरबाजी के बजाय स्टार्टअप्स, पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। उन्होंने महाराष्ट्र और NIT श्रीनगर के छात्रों से मुलाकात के दौरान युवाओं से नवाचार, तकनीक और आपसी सहयोग के जरिए समाज की समस्याओं का समाधान खोजने की अपील की।

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    ‘युवा संगम’ के प्रतिभागियों से मिले उपराज्यपाल

    श्रीनगर स्थित लोक भवन में रविवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘युवा संगम चरण-VII’ के प्रतिभागियों के साथ बातचीत की। महाराष्ट्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए छात्रों के समूह का नेतृत्व IIT मुंबई कर रहा था। इस दौरान NIT श्रीनगर के छात्र भी मौजूद रहे।

    मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए युवाओं के बीच सहयोग, मार्गदर्शन और राष्ट्रीय एकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमियों से आने वाले युवाओं के बीच संवाद से आपसी समझ बढ़ती है और नए विचारों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

    ‘जम्मू-कश्मीर में हर क्षेत्र में नए अवसर’

    उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर्यटन, स्टार्टअप, कृषि, हस्तशिल्प, तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में हजारों युवा उद्यमी सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं।

    उन्होंने कहा, “बंद और पत्थरबाजी के दिन अब लद गए हैं। आज जम्मू-कश्मीर अपने फलते-फूलते स्टार्टअप्स के लिए चर्चा में है, जहां स्कूल, कॉलेज और कारोबार पूरे साल बिना किसी रुकावट के चल रहे हैं।”

    सिन्हा ने श्रीनगर और जम्मू में बढ़ती सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर में अपने अनुभवों को परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें, ताकि क्षेत्र में हो रहे बदलावों और उपलब्ध अवसरों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचे।

    युवाओं से नवाचार और मेंटरशिप पर जोर

    मनोज सिन्हा ने कहा कि बड़े बदलाव लाने वाले विचार केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास से सामने नहीं आते। इसके लिए प्रतिभाशाली युवाओं, मार्गदर्शकों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग का माहौल जरूरी है।

    उन्होंने छात्रों से अपने नए विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने और उनका इस्तेमाल समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने में करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक संस्थानों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी से शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    AI और गलत सूचनाओं की चुनौती पर भी बोले सिन्हा

    उपराज्यपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु परिवर्तन और गलत सूचनाओं के प्रसार जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ किया जाना चाहिए।

    सिन्हा के मुताबिक, तकनीकी विकास के साथ मानवीय मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI जैसी तकनीकों पर मानवीय नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण है और युवाओं को डिजिटल बदलाव का नेतृत्व करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए।

    ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने की अपील

    मनोज सिन्हा ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

    उन्होंने ‘युवा संगम’ के प्रतिभागियों से कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी एक-दूसरे से जुड़े रहने और राष्ट्रीय एकता के दूत के रूप में काम करने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, युवाओं के बीच आपसी सहयोग और संस्थानों की साझेदारी देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    कार्यक्रम में उपराज्यपाल के प्रधान सचिव गोविंद जायसवाल, IIT मुंबई के प्रतिनिधि, NIT श्रीनगर के संकाय सदस्य और छात्र सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

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