Last updated: October 30th, 2026 at 05:39 pm

इजरायल के संसदीय चुनाव में किसी भी राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की राह मुश्किल होती दिख रही है। 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, लेकिन अंतिम मतगणना के बाद नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर सिमट गया है। वहीं, विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। अरब पार्टियों के खाते में कुल 19 सीटें आई हैं।
चुनाव के शुरुआती एग्जिट पोल में भी किसी एक पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा था। हालांकि, अंतिम नतीजों ने तस्वीर को और साफ कर दिया है। अब सरकार गठन के लिए छोटे दलों और अरब पार्टियों का समर्थन बेहद अहम हो गया है।
नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसके नेतृत्व वाले गठबंधन के पास बहुमत से आठ सीटें कम हैं। दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं।
विपक्षी गठबंधन के लिए भी सरकार बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, विपक्षी खेमे में शामिल सभी दल अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर एकमत नहीं हैं।
अरब पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी?
इस चुनाव में अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। ऐसे में अगली सरकार के गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। अगर विपक्षी गठबंधन को इन पार्टियों का पूरा समर्थन मिलता है, तो उसके पास बहुमत का आंकड़ा पार करने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेद हैं। कुछ नेताओं ने उनके साथ सरकार बनाने पर आपत्ति जताई है, जबकि कुछ दल सहयोग के विकल्प खुले रखने के पक्ष में हैं। ऐसे में सरकार गठन की बातचीत काफी पेचीदा हो सकती है।
रिकॉर्ड मतदान ने भी चौंकाया
इजरायल के इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही। मतदान प्रतिशत 77.7 फीसदी दर्ज किया गया, जो पिछले 27 वर्षों में सबसे अधिक बताया गया है। अरब मतदाताओं की बड़ी भागीदारी ने भी चुनावी नतीजों को प्रभावित किया है।
अब कैसे बनेगी इजरायल में सरकार?
इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। अब राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग संसदीय दलों से बातचीत करेंगे और सरकार बनाने के लिए किसी नेता को मौका देंगे।
फिलहाल नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती है। ऐसे में छोटी पार्टियों का रुख और गठबंधन की बातचीत तय करेगी कि इजरायल की अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी। अगर कोई भी पक्ष बहुमत का समर्थन नहीं जुटा पाता है, तो देश में एक बार फिर चुनाव की नौबत आ सकती है।
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