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दिल्ली में प्रदूषण से राहत के लिए मेट्रो का बड़ा फैसला, रोजाना चलेंगी 20 अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं; GRAP-2 के बीच यात्रियों को मिलेगी सुविधा

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के
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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। GRAP-2 लागू होने के बाद दिल्ली मेट्रो ने यात्रियों की सुविधा के लिए सप्ताह के कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे चलाने की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना और सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम करने में मदद करना है।

     

    दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। मंगलवार, 3 नवंबर को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण यानी GRAP-2 को लागू किया है। इसके तहत प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।

     

    दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं भी माना जाता है। राजधानी की सड़कों पर प्रतिदिन लाखों निजी वाहन चलते हैं। विशेष रूप से व्यस्त समय में ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों का उत्सर्जन बढ़ जाता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

     

    DMRC की ओर से घोषित 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरों से यात्रियों को मेट्रो सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य दैनिक यात्रियों को यात्रा के लिए अधिक विकल्प मिल सकेंगे। अतिरिक्त सेवाओं का उद्देश्य व्यस्त समय में यात्रियों की भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना भी है।

     

    दिल्ली मेट्रो राजधानी की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिल्ली और आसपास के शहरों में रहने वाले लाखों लोग प्रतिदिन मेट्रो के माध्यम से अपने कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी मेट्रो एक महत्वपूर्ण साधन है।

     

    GRAP-2 के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं। इनमें सड़कों की मैकेनिकल सफाई, धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण शामिल हैं। संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का प्रभावी ढंग से पालन हो।

     

    विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सकती है। यदि अधिक लोग कार और बाइक के बजाय मेट्रो तथा बसों का इस्तेमाल करें, तो सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनसे होने वाला उत्सर्जन घटाया जा सकता है। हालांकि, केवल मेट्रो सेवाओं में वृद्धि से प्रदूषण की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके लिए औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर भी नियंत्रण जरूरी है।

     

    दिल्ली में खराब वायु गुणवत्ता का असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी जा रही है।

     

    दिल्ली मेट्रो की अतिरिक्त सेवाओं का फैसला ऐसे समय में आया है जब राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में मौसम और हवा की गति के आधार पर AQI में बदलाव हो सकता है। फिलहाल प्रशासन का जोर प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों को नियंत्रित करने और लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने पर है।

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