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रोहतास में तंबाकू नियंत्रण अभियान पर संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला, बच्चों को लत से बचाने पर दिया गया जोर

रोहतास (20 अगस्त 2025): जिला प्रशासन, रोहतास एवं राज्य सरकार की तकनीकी सहयोगी संस्था सोशियो-इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स)
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रोहतास (20 अगस्त 2025): जिला प्रशासन, रोहतास एवं राज्य सरकार की तकनीकी सहयोगी संस्था सोशियो-इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को “तंबाकू नियंत्रण अभियान” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी, रोहतास श्रीमती उदिता सिंह ने की।

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    इस अवसर पर जिला विकास आयुक्त, नगर आयुक्त, सिविल सर्जन, पुलिस उप अधीक्षक, जिला योजना पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक, कृषि पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग समेत जिले के सभी प्रमुख सरकारी पदाधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, पंजीकृत अस्पताल प्रतिनिधि एवं मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।

    बच्चों और समाज के लिए गंभीर चुनौती

    डीएम उदिता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तंबाकू की लत आज बच्चों और युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि समाज को इस दिशा में जागरूक करने और कानून का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है। उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे विद्यालयों, पंचायतों और गांव-गांव में जाकर लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।

    तंबाकू नियंत्रण कानून की जानकारी

    कार्यशाला के दौरान सीड्स के तकनीकी सहयोग से गठित त्रिस्तरीय छापामार दस्ता के सदस्यों को तंबाकू नियंत्रण अधिनियम (COTPA 2003) के विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान यह बताया गया कि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध, विद्यालय परिसरों से 100 गज की दूरी तक तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक और नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर कानूनी कार्रवाई जैसे प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जाए।

    विशेषज्ञों ने बताया कि तंबाकू सेवन न केवल कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बनता है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी परिवार को कमजोर करता है। बच्चों में इसकी शुरुआत अक्सर मज़ाक या आदत के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर लत में बदल जाती है।

    सभी विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी

    संगोष्ठी में निर्णय लिया गया कि जिले के सभी विभाग इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करेंगे। शिक्षा विभाग को स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई, वहीं स्वास्थ्य विभाग को गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर लगाने का निर्देश दिया गया। परिवहन विभाग को बस अड्डों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखने का काम सौंपा गया।

    व्यापक जनजागरण पर जोर

    अधिकारियों ने कहा कि तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाव केवल कानून लागू करने से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करना जरूरी है। इस दिशा में पंचायत स्तर पर गोष्ठियां, नुक्कड़ नाटक और स्कूलों में वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों और उपस्थित प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे मिलकर जिले को “तंबाकू मुक्त” बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे और युवा तंबाकू से दूर रहेंगे तो समाज और आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त होगी।

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