Last updated: August 22nd, 2025 at 05:23 pm

पटना। बिहार में भूमि संबंधी मामलों को लेकर आमजन को अक्सर होने वाली परेशानियों पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। दाखिल-खारिज (Land Mutation) प्रक्रिया में मनमानी या मनमुताबिक अस्वीकृति पर अब अंचलाधिकारियों (CO) को जवाबदेह बनाया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि किसी भी दाखिल-खारिज आवेदन को अस्वीकार करने पर, अंचलाधिकारी को उसका स्पष्ट, ठोस और वैध कारण लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा सभी जिलाधिकारियों (DMs) को जारी किए गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी दाखिल-खारिज आवेदन को खारिज किया जाता है, तो उसका कारण स्पष्ट रूप से लिखा जाए और उसकी कॉपी आवेदक (रैयत) को व्यक्तिगत रूप से या पंजीकृत डाक/संदेशवाहक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी विभाग द्वारा यह निर्देश जारी किया गया था कि बिना कारण बताए कोई भी आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा था। कई मामलों में मामूली त्रुटियों या तकनीकी कारणों के आधार पर आवेदन खारिज कर दिए जा रहे थे, जिससे न केवल भूमि मालिकों को मानसिक व आर्थिक पीड़ा हो रही थी, बल्कि कई मामलों में भूमि विवाद भी जन्म ले रहे थे।
इस लापरवाही को देखते हुए विभाग ने एक बार फिर से निर्देश जारी करते हुए सख्त चेतावनी दी है कि यदि अब भी शिकायतें मिलती रहीं, तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
राज्य भर में दाखिल-खारिज से जुड़े 50,000 से अधिक आवेदन फिलहाल लंबित हैं, जिनमें से कई 75 दिनों से भी अधिक समय से अटके हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राजस्व कार्यालयों में प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है, जिसे यह नया निर्देश सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
इस नई व्यवस्था से आम रैयतों को पारदर्शिता और न्याय की बड़ी उम्मीद मिली है। लंबे समय से दाखिल-खारिज की प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार, लेटलतीफी और मनमानी की शिकायतें मिलती रही हैं। अब इस नए आदेश से भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों में भी कमी आने की संभावना है।
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