Last updated: August 23rd, 2025 at 07:03 pm

सासाराम, 23 अगस्त।
रोहतास जिले के सासाराम नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत तकिया मोहल्ले में आज शाम पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच हुई मुठभेड़ में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की सूझबूझ और तत्परता से अपहृत शारीरिक शिक्षक दिलीप कुमार को सकुशल छुड़ा लिया गया, जबकि इस कार्रवाई में दो अपराधी गोली लगने से घायल हुए हैं और छह अन्य को गिरफ्तार किया गया है। घटनास्थल से हथियार भी बरामद किए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिलीप कुमार, जो कोचस थाना क्षेत्र के राजकीय मध्य विद्यालय, कपसियां में शारीरिक शिक्षक हैं, को शुक्रवार की शाम स्कूल से घर लौटते वक्त अपराधियों ने अगवा कर लिया था। मामला संज्ञान में आने के बाद से ही पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी थी।
शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी सत्य प्रकाश ने बताया कि एक गुप्त सूचना मिली थी कि अपहृत शिक्षक को सासाराम के तकिया मोहल्ले में छिपाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अलग-अलग टीमों का गठन किया और इलाके में छापेमारी शुरू की। इसी दौरान अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलीबारी की।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो अपराधी पैर में गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल, सासाराम में भर्ती कराया गया है। वहीं, अन्य चार अपराधियों को मौके से गिरफ्तार किया गया।
डीआईजी सत्य प्रकाश ने मीडिया को बताया कि यह मुठभेड़ रोहतास पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बिना किसी नुकसान के अपहृत को सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि पकड़े गए अपराधियों से पूछताछ की जा रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
इस घटना के साथ ही एक बार फिर बिहार पुलिस का ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ चर्चा में आ गया है। यह विशेष अभियान उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य अपराधियों में डर पैदा करना और अपराध पर लगाम लगाना है।
इस ऑपरेशन के तहत पुलिस भागने की कोशिश या हमला करने वाले अपराधियों के पैरों में गोली मारती है, जिससे उन्हें जीवित पकड़ा जा सके। यही रणनीति इस मुठभेड़ में भी देखी गई, जहां घायल अपराधियों को पुलिस ने दबोच लिया।
राज्य भर में इस अभियान के तहत पुलिस अब तक पटना, दानापुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा समेत कई जिलों में कुख्यात अपराधियों को पकड़ने में सफल रही है। अपराधियों में इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी देखा जा रहा है और कई फरार बदमाश अब पुलिस से आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
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