Last updated: August 30th, 2025 at 04:24 am

सासाराम शहर में जाम की समस्या दिन-प्रतिदिन भयावह रूप लेती जा रही है। आलम यह है कि पाँच मिनट की दूरी तय करने में लोगों को आधा घंटा से ज्यादा वक्त लग रहा है। सड़कें वाहनों से पटी रहती हैं, रेंगते वाहनों के बीच पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। प्रशासन की तमाम कोशिशों और दावों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
शहर के प्रमुख इलाकों—पोस्ट ऑफिस चौराहा, कचहरी मोड़ और गौरक्षणी—जाम के स्थायी अड्डे बन चुके हैं। सुबह से रात तक लोग यहाँ जाम की समस्या से जूझते रहते हैं। खासकर पोस्ट ऑफिस चौराहा तो मानो जाम का पर्याय बन गया है। लोगों की शिकायत है कि इस समस्या से राहत तो दूर, दिन-ब-दिन हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
शुक्रवार को जाम की भयावह तस्वीर तब सामने आई जब खुद रोहतास की जिलाधिकारी उदिता सिंह करीब आधे घंटे तक पोस्ट ऑफिस चौराहा के पास जाम में फंसी रहीं। डीएम की गाड़ी निकालने के लिए पुलिस बल को पसीना बहाना पड़ा। सवाल यह उठता है कि जब जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी तक जाम में फंस जाती हैं, तो आम जनता की परेशानी का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
लोगों का कहना है कि जाम अब रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। बच्चे स्कूल देर से पहुँचते हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते, कारोबारियों का कामकाज बाधित होता है। यहाँ तक कि सरकारी अधिकारियों की गाड़ियाँ भी प्रतिदिन जाम में फंस जाती हैं, मगर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने का ठोस प्रयास नहीं दिखता।
शहरवासियों को उम्मीद थी कि ट्रैफिक लाइट लगने के बाद समस्या कम होगी, लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ। ट्रैफिक पुलिस की संख्या सीमित है, फुटपाथ पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आधी-अधूरी है और वैकल्पिक मार्ग विकसित नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि सड़कों पर जाम की जकड़न लगातार बढ़ती जा रही है।
अब शहरवासी सवाल कर रहे हैं—आखिर कब तक जाम की समस्या से लोग जूझते रहेंगे? कब तक घंटों की मशक्कत के बाद लोग अपने गंतव्य तक पहुँचेंगे? प्रशासन ने अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो सासाराम में ट्रैफिक की समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
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