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टिकट नहीं मिलने से नाराज जदयू नेता बद्री भगत ने दिया इस्तीफा — कहा, 1994 से पार्टी के लिए किया समर्पित कार्य, पर योगदान को किया गया नजरअंदाज

पटना। विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट वितरण के बाद जदयू में असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। लंबे समय से
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पटना। विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट वितरण के बाद जदयू में असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। लंबे समय से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे जदयू नेता बद्री भगत ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है।

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    बद्री भगत ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि उन्हें यह कहते हुए गहरा दुख हो रहा है कि वर्ष 1994 से कुर्मी महा चेतना रैली के समय से वे लगातार पार्टी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विश्वास रखते हुए काम करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी के आश्वासन पर उन्होंने पिछले छह महीनों से क्षेत्र में लगातार चुनावी तैयारी और जनसंपर्क अभियान चलाया।

     

    बद्री भगत ने कहा कि 3 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें बुलाकर प्रदेश अध्यक्ष से कहा था कि “इनका नाम लिख लीजिए, इनको चुनाव लड़ाना है”, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके समर्पण और योगदान की अनदेखी है, जिससे वे गहराई से आहत हैं।

     

    गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा कि — “यह मेरे हृदय पर घात करने के समान है।” उन्होंने घोषणा की कि वे अपने 3,875 सक्रिय सदस्यों और हजारों समर्थकों के साथ जनता दल (यूनाइटेड) के सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।

     

    बद्री भगत के इस्तीफे के बाद पार्टी के स्थानीय संगठन में हलचल मच गई है। समर्थकों का कहना है कि भगत हमेशा जनता के बीच सक्रिय रहे हैं और उनका निर्णय पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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