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बिहार में अवैध बालू और जमीन माफियाओं पर EOU की सख्त कार्रवाई!

बिहार में अवैध बालू और जमीन माफियाओं पर EOU की सख्त कार्रवाई बिहार में लंबे समय से बालू खनन और
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बिहार में अवैध बालू और जमीन माफियाओं पर EOU की सख्त कार्रवाई

बिहार में लंबे समय से बालू खनन और जमीन कब्जा करने वाले माफिया सक्रिय रहे हैं। इन माफियाओं की वजह से राज्य को आर्थिक नुकसान होता है और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने के लिए अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है जो माफियाओं पर कड़ी नजर रखेगी।

विशेष टास्क फोर्स का गठन

EOU ने जो टास्क फोर्स बनाई है, उसका नेतृत्व डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों करेंगे। उनके साथ एसपी राजेश कुमार, कई डीएसपी और इंस्पेक्टर शामिल किए गए हैं। यह टीम अलग-अलग जिलों में जाकर अवैध गतिविधियों की जांच करेगी। अब तक कई बार छापेमारी तो होती थी, लेकिन वह इतनी प्रभावी नहीं थी कि माफिया गैंग पूरी तरह खत्म हो सके। नई टास्क फोर्स का लक्ष्य है कि यह नेटवर्क जड़ से समाप्त किया जाए।

टास्क फोर्स का मुख्य काम

इस टीम का सबसे बड़ा काम होगा कि जहां भी अवैध बालू खनन होता है, वहाँ तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन लोगों ने जमीन पर गलत तरीके से कब्जा किया है, उन्हें भी चिन्हित कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। टास्क फोर्स अवैध कमाई के स्रोतों की भी जांच करेगी। मतलब, माफियाओं ने जो पैसा कमाया है, वह कहाँ से आया और कहाँ खर्च किया गया। अगर जरूरत पड़े तो उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी।

तकनीकी साधनों का उपयोग

पहले कई माफिया पुलिस कार्रवाई से बच जाते थे क्योंकि वे दूरदराज के इलाकों में गुप्त तरीके से काम करते थे। अब टास्क फोर्स ड्रोन कैमरा, मोबाइल ट्रैकिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे आधुनिक साधनों का इस्तेमाल करेगी। इससे प्रशासन को पता चल सकेगा कि किस जगह रात में खनन हो रहा है या कहाँ जमीन कब्जाई जा रही है।

बालू खनन से होने वाला नुकसान

अवैध बालू खनन सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाता, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है। नदियों से जरूरत से ज्यादा बालू निकालने से नदी का प्रवाह बदल सकता है। कई बार पुल और सड़कें कमजोर हो जाती हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सरकार चाहती है कि इस समस्या को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए।

जमीन माफियाओं का बढ़ता प्रभाव

जमीन माफिया बिहार में कई वर्षों से सक्रिय हैं। वे फर्जी कागज बनाकर लोगों की जमीन कब्जा लेते हैं या सरकारी जमीन को भी बेच देते हैं। इससे गरीब और आम लोगों को भारी नुकसान होता है। कई लोग अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए सालों तक कोर्ट-कचहरी में भटकते रहते हैं। टास्क फोर्स इन मामलों की जांच कर ऐसे माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करेगी।

सरकार का रुख

राज्य सरकार ने साफ कहा है कि माफिया कितना भी ताकतवर या प्रभावशाली क्यों न हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि टास्क फोर्स को पूरा सहयोग दिया जाए। अगर अधिकारी इस काम में लापरवाही दिखाते हैं तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।कुल मिलाकर, EOU की यह विशेष टास्क फोर्स बिहार में बालू और जमीन माफिया के खिलाफ एक बड़ा और असरदार कदम है। जनता भी उम्मीद कर रही है कि इस सख्त अभियान से न सिर्फ अवैध खनन रुकेगा बल्कि जमीन कब्जा की घटनाएँ भी कम होंगी। अगर यह अभियान लगातार चलता रहा तो आने वाले दिनों में बिहार को इन माफियाओं से बड़ी राहत मिल सकती है।

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