Last updated: December 13th, 2025 at 01:27 pm

पटना से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में 82 वर्षीय एक बुजुर्ग को डिजिटल फ्रॉड के जरिए 1 करोड़ 16 लाख रुपये की भारी रकम से ठग लिया गया। ठगों ने खुद को भरोसेमंद संस्थान या अधिकारी बताकर बुजुर्ग को अपने जाल में फंसाया और धीरे-धीरे उनके बैंक खाते से बड़ी रकम निकाल ली। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
साइबर ठगों ने पहले फोन कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क किया। उन्होंने डर और लालच दोनों का इस्तेमाल किया। कभी बैंक खाता बंद होने की बात कही गई, तो कभी किसी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। बुजुर्ग को तकनीक की ज्यादा जानकारी नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर ठगों ने उनसे ओटीपी, बैंक डिटेल और जरूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद कई बार में उनके खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए गए।
मामले की शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जांच शुरू की। तकनीकी जांच, कॉल डिटेल और बैंक लेन-देन की मदद से पुलिस ने इस गिरोह तक पहुंच बनाई। जांच के बाद तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बना रहा था।
डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ा है। लोग मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों को लेकर जागरूक नहीं हैं। खासकर बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग साइबर ठगों के आसान शिकार बन जाते हैं। ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को भ्रमित करते हैं।
बुजुर्ग अक्सर तकनीक पर दूसरों की तुलना में कम भरोसा और समझ रखते हैं। वे आसानी से डर जाते हैं और सामने वाले की बातों पर विश्वास कर लेते हैं। साइबर ठग इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं। इस मामले ने साफ कर दिया है कि बुजुर्गों को विशेष सतर्कता और मार्गदर्शन की जरूरत है।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और पुलिस को लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। बैंक, पुलिस और प्रशासन को मिलकर लोगों को यह समझाना होगा कि कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन पर ओटीपी या निजी जानकारी नहीं मांगती। साइबर हेल्पलाइन को और मजबूत करना भी जरूरी है।
इस घटना से आम लोगों को सबक लेना चाहिए। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। अपनी बैंक और निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अगर किसी तरह का संदेह हो, तो तुरंत बैंक या पुलिस से संपर्क करें।पटना का यह मामला बिहार ही नहीं, पूरे देश के लिए चेतावनी है। साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और इससे बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर लोग सतर्क रहें और सही समय पर शिकायत करें, तो ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है।
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