Last updated: December 16th, 2025 at 09:34 am

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल अभी से अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। सभी पार्टियों की कोशिश है कि वे समय रहते जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर लें और खास तौर पर दलित व अन्य महत्वपूर्ण वोटरों को अपने पक्ष में कर सकें।
भाजपा की बात करें तो पार्टी सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। मुफ्त राशन, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। भाजपा दलित समाज को जोड़ने के लिए सामाजिक समरसता कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और स्थानीय नेताओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि विकास का लाभ सभी वर्गों को मिला है।
समाजवादी पार्टी भी 2027 को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गई है। सपा का फोकस पिछड़े वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक और युवा वोटरों पर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरकर जनता के बीच भरोसा बनाया जाएगा। सपा लगातार गांव-गांव जाकर जनसभाएं और बैठकों के जरिए लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रही है।
बहुजन समाज पार्टी के लिए दलित वोट बैंक सबसे अहम माना जाता है। बसपा अपनी पुरानी रणनीति को फिर से मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि दलित समाज अब भी उनकी सबसे बड़ी ताकत है। बसपा सामाजिक न्याय, सम्मान और अधिकारों के मुद्दे को उठाकर दलितों को फिर से एकजुट करने का प्रयास कर रही है। पार्टी संगठन को नीचे तक मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी दलित, महिला और युवा वर्ग पर फोकस कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे जनता की समस्याओं को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। इसके लिए प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत करने और नए चेहरों को सामने लाने की योजना बनाई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दलित वोट उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से सभी पार्टियाँ उन्हें साधने में जुटी हैं। इसके साथ ही किसान, युवा, महिला और शहरी मतदाताओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। हर पार्टी अपने-अपने तरीके से जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि वही उनके हितों की सबसे बेहतर प्रतिनिधि है।
कुल मिलाकर, 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति अभी से गर्म हो गई है। आने वाले समय में रैलियां, घोषणाएं और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होगी। यह साफ है कि दलित और अन्य अहम वोटरों की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
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