Last updated: December 17th, 2025 at 02:33 pm

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। इनमें निर्माण कार्यों पर रोक भी शामिल है। इस वजह से सबसे ज्यादा असर निर्माण मजदूरों पर पड़ा है, क्योंकि उनका रोज़ का काम बंद हो गया है और आमदनी रुक गई है। इसी समस्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने निर्माण मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है।
दिल्ली सरकार ने कहा है कि जिन निर्माण मजदूरों की रोज़ी-रोटी प्रदूषण के कारण प्रभावित हुई है, उन्हें ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह पैसा सीधे मजदूरों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो और तुरंत मदद मिल सके। सरकार का मानना है कि इस सहायता से मजदूर अपने परिवार का खर्च, खाने-पीने और ज़रूरी जरूरतों को कुछ हद तक पूरा कर पाएंगे।
यह सहायता उन्हीं निर्माण मजदूरों को मिलेगी जो दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हैं। सरकार ने मजदूरों से अपील की है कि वे अपना पंजीकरण समय पर पूरा रखें और बैंक खाते की जानकारी सही रखें, ताकि पैसा सीधे खाते में पहुंच सके। जिन मजदूरों का पंजीकरण पहले से है, उन्हें अलग से कोई आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर ही राशि भेजेगी।
प्रदूषण के कारण निर्माण कार्य रुकने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाते हैं। अधिकतर मजदूर दिहाड़ी पर काम करते हैं और उनकी कोई बचत नहीं होती। ऐसे में कुछ दिनों का काम बंद होना भी उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। दिल्ली सरकार का कहना है कि यह कदम मजदूरों को सम्मान के साथ जीने में मदद करेगा और उन्हें मजबूरी में शहर छोड़कर जाने से भी रोकेगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह सहायता आपात स्थिति के लिए है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर ऐसे और कदम उठाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार प्रदूषण कम करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है, ताकि हालात जल्द सामान्य हो सकें और मजदूरों को फिर से काम मिल सके।
निर्माण मजदूर संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ₹10,000 की राशि भले ही लंबे समय के लिए काफी न हो, लेकिन संकट के समय में यह बड़ी राहत है। इससे मजदूरों को थोड़ी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे अपने परिवार के लिए जरूरी खर्च निकाल सकेंगे।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार की यह योजना प्रदूषण से प्रभावित निर्माण मजदूरों के लिए एक सहारा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि सरकार संकट के समय अपने मेहनतकश लोगों के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को समझती है।
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