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दिल्ली विधानसभा चुनाव: सियासी हलचल तेज!

दिल्ली की राजनीति: चुनावी माहौल गरम दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी
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दिल्ली की राजनीति: चुनावी माहौल गरम

दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी का सियासी माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटी हुई हैं। हर पार्टी जनता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है और विरोधी दलों पर लगातार हमले कर रही है।

आम आदमी पार्टी अपनी सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दा बना रही है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी के क्षेत्र में दिल्ली में बड़े बदलाव हुए हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में सुधार को पार्टी अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही है। मुख्यमंत्री और पार्टी के नेता जनसभाओं में यह दावा कर रहे हैं कि दिल्ली मॉडल को देश के अन्य राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए।

वहीं भारतीय जनता पार्टी आम आदमी पार्टी की सरकार पर भ्रष्टाचार और झूठे वादों का आरोप लगा रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि दिल्ली सरकार ने कई योजनाओं में अनियमितताएं की हैं और जनता को गुमराह किया जा रहा है। बीजेपी कानून-व्यवस्था, प्रदूषण और यमुना की सफाई जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी यह भी कह रही है कि दिल्ली को केंद्र सरकार के सहयोग से ही सही दिशा में ले जाया जा सकता है।

कांग्रेस भी धीरे-धीरे चुनावी मैदान में सक्रिय हो रही है। पार्टी पुराने दिनों की तरह मजबूत वापसी की कोशिश में लगी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों ने दिल्ली की जनता को निराश किया है। वे महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर वर्गों की समस्याओं को अपना मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। कांग्रेस जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है।

चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक एक-दूसरे पर तीखे बयान दिए जा रहे हैं। हर पार्टी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वही दिल्ली की सबसे बेहतर विकल्प है। नेताओं के बयान अब व्यक्तिगत आरोपों तक भी पहुंचने लगे हैं, जिससे सियासत और ज्यादा गरम हो गई है।

दिल्ली की जनता के सामने इस बार कई सवाल हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आने वाले पांच सालों में कौन-सी पार्टी उनकी समस्याओं का बेहतर समाधान कर पाएगी। बिजली-पानी, शिक्षा-स्वास्थ्य, ट्रैफिक, प्रदूषण और रोजगार जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम बने हुए हैं।

कुल मिलाकर दिल्ली की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। चुनाव नजदीक आते ही प्रचार और तेज होगा और सियासी बयानबाजी और भी बढ़ेगी। अब देखना यह है कि जनता किस पार्टी पर भरोसा जताती है और दिल्ली की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाती है।

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