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दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर राजनीति तेज!

दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर राजनीति तेज: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई
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दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर राजनीति तेज:

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। सर्दियों के मौसम में हर साल प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है और इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। जहरीली हवा की वजह से आम लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और बच्चों-बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में दिल्ली विधानसभा से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल रही है।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है कि प्रदूषण के लिए सिर्फ दिल्ली जिम्मेदार नहीं है। सरकार का आरोप है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और केंद्र सरकार की नीतियां भी इसके बड़े कारण हैं। दिल्ली सरकार यह भी कहती है कि उसने इलेक्ट्रिक बसें, ऑड-ईवन योजना, एंटी-स्मॉग गन और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए हैं, लेकिन फिर भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो रही है।

वहीं विपक्षी दल, खासकर भाजपा और कांग्रेस, दिल्ली सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार हर साल प्रदूषण का रोना तो रोती है, लेकिन ठोस और स्थायी समाधान पर काम नहीं करती। विपक्ष का आरोप है कि ऑड-ईवन जैसी योजनाएं सिर्फ दिखावा हैं और इससे आम लोगों को परेशानी होती है, जबकि प्रदूषण में खास कमी नहीं आती। भाजपा नेताओं का कहना है कि दिल्ली सरकार सिर्फ केंद्र और पड़ोसी राज्यों पर जिम्मेदारी डालकर खुद बचने की कोशिश कर रही है।

इस मुद्दे पर संसद में भी बहस हो रही है। सांसदों ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण को राष्ट्रीय समस्या बताया है और कहा है कि इसका समाधान सिर्फ किसी एक राज्य या सरकार के बस की बात नहीं है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है और प्रदूषण कम करने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर नजर नहीं आ रहा है।

दिल्ली के आम नागरिक इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि हर साल नेता एक-दूसरे पर दोष मढ़ते हैं, लेकिन उनकी सेहत से जुड़ी इस गंभीर समस्या का हल नहीं निकलता। स्कूलों में बच्चों को मास्क पहनने पड़ रहे हैं, बुजुर्ग घरों में कैद होने को मजबूर हैं और अस्पतालों में सांस के मरीज बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण पर राजनीति करने के बजाय सभी सरकारों और राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना चाहिए। इसके लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सुधारने, उद्योगों पर सख्ती, पराली जलाने का स्थायी समाधान और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। जब तक केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर जिम्मेदारी नहीं लेंगी, तब तक दिल्ली की हवा साफ होना मुश्किल है।

कुल मिलाकर, दिल्ली विधानसभा और संसद में प्रदूषण को लेकर सियासी लड़ाई तेज है, लेकिन आम जनता को अब बहस नहीं, बल्कि साफ हवा और ठोस समाधान चाहिए।

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