Last updated: December 25th, 2025 at 09:21 am

सासाराम।
रोहतास जिला प्रशासन के तत्वावधान में सोमवार को फजलगंज स्थित मल्टीपर्पस हॉल में “मंथन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी रोहतास श्रीमती उदिता सिंह ने की। इस अवसर पर उत्तरदायी प्रशासन, राजस्व सुधार एवं महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विस्तृत एवं सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के दौरान कुल तीन सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में जिलाधिकारी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी सासाराम, अनुमंडल पदाधिकारी डेहरी, उप समाहर्ता-सह-भूमि सुधार उपसमाहर्ता बिक्रमगंज, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, विशेष कार्य पदाधिकारी सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी श्रीमती उदिता सिंह ने अपने संबोधन में अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों, मीडिया, न्यायपालिका, सरकार, विद्यार्थियों, महिलाओं, कमजोर एवं वंचित वर्गों के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशील एवं जवाबदेह रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का अनुपालन नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ सुशासन को धरातल पर उतारना होना चाहिए।
दूसरे सत्र में अपर समाहर्ता ने राजस्व से संबंधित विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, समयबद्ध सेवा प्रदायगी, भूमि एवं राजस्व मामलों के त्वरित निष्पादन तथा जनहितकारी सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व सुधारों से आम नागरिकों को राहत मिलेगी और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
तीसरे सत्र में उप समाहर्ता अमृता ओशो ने महिला सशक्तिकरण विषय पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास संभव नहीं है। प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अधिकारियों ने भी उत्तरदायी प्रशासन, राजस्व सुधार एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस प्रकार के संवादात्मक मंच को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और जनहितकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उपयोगी बताया।
अंत में जिलाधिकारी ने “मंथन” कार्यक्रम को एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इस तरह के विमर्श से प्रशासनिक सोच को नई दिशा मिलती है तथा बेहतर कार्यसंस्कृति का विकास होता है। कार्यक्रम का समापन सार्थक निष्कर्षों एवं भविष्य में और अधिक प्रभावी प्रयासों के संकल्प के साथ किया गया।
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