Last updated: December 27th, 2025 at 04:17 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज दिल्ली में देश के मुख्य सचिवों का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना, विकास योजनाओं की समीक्षा करना और प्रशासनिक सुधारों को गति देना है। यह बैठक देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के विकास में प्रशासन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनका लाभ सही समय पर आम जनता तक पहुंचे। इसके लिए ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने मुख्य सचिवों से कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और फाइलों के बजाय जमीन पर काम होता दिखना चाहिए।
इस सम्मेलन में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, डिजिटल प्रशासन, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। खासतौर पर यह देखा गया कि केंद्र सरकार की योजनाएं राज्यों में किस तरह लागू हो रही हैं और कहां पर सुधार की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच अच्छे कामों को साझा किया जाना चाहिए, ताकि एक राज्य की सफलता दूसरे राज्य के लिए प्रेरणा बन सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के जरिए भ्रष्टाचार कम किया जा सकता है और सेवाएं लोगों तक तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे डेटा और तकनीक का इस्तेमाल करके योजनाओं की निगरानी करें और समस्याओं का समय पर समाधान करें। इससे प्रशासन पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
सम्मेलन में रोजगार सृजन पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार देना देश की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए उद्योग, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे स्थानीय स्तर पर निवेश को प्रोत्साहित करें, ताकि लोगों को अपने ही राज्य में काम के अवसर मिल सकें।
इसके अलावा सम्मेलन में आकांक्षी जिलों के विकास, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी मंथन हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ आंकड़ों में सुधार करना नहीं है, बल्कि आम आदमी के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील बनने और जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की सलाह दी।
कुल मिलाकर, मुख्य सचिवों का यह राष्ट्रीय सम्मेलन नीति और प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु बनाने का प्रयास है। इससे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ेगा और विकास की रफ्तार तेज होगी। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुआ यह सम्मेलन आने वाले समय में बेहतर शासन व्यवस्था और समावेशी विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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