Last updated: December 29th, 2025 at 04:05 pm

दिल्ली पुलिस ने मल्टी‑क्रोर साइबर स्कैम के चार आरोपी गिरफ्तार किए, फर्जी ट्रेडिंग ऐप से लोगों को ठगा
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक बड़े मल्टी‑क्रोर साइबर स्कैम का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया है। जांच में यह सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप और ऑनलाइन ग्रुप के जरिए लोगों से लाखों रुपये ठगे। इस तरह के डिजिटल अपराध ने आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़े लाभ का झांसा देता था। फर्जी ट्रेडिंग ऐप में निवेश करने वाले लोगों को ज्यादा मुनाफा और तेज रिटर्न का वादा किया जाता था। इस झांसे में आने के बाद लोग अपने पैसे ऐप पर जमा करते थे, लेकिन असल में यह पैसा गिरोह के अकाउंट में चला जाता था। आरोपियों ने अपने ग्रुप में लोगों को विश्वास में लेने और फर्जी प्रोफाइल बनाने का भी इस्तेमाल किया।
जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल सबूत और वित्तीय लेनदेन का गहन विश्लेषण किया। इसके तहत यह पता चला कि आरोपियों का नेटवर्क दिल्ली और आसपास के राज्यों में फैला हुआ था। गिरोह ने तकनीकी और डिजिटल ज्ञान का इस्तेमाल करके पहचान छुपाई और लेनदेन को छुपाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी साधनों और डिजिटल जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगा लिया।
पुलिस ने बताया कि यह मामला केवल पैसे ठगने तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने फर्जी ऐप और ग्रुप का इस्तेमाल कर लोगों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी भी चुराई। इससे पीड़ितों को आगे और बड़े जोखिम का सामना करना पड़ सकता था। गिरोह ने डिजिटल पहचान और ऑनलाइन प्रोफाइल का दुरुपयोग कर निवेशकों को धोखा दिया और उनका पैसा हड़प लिया।
आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट, धारा 420 और अन्य संबंधित अपराध के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि अब आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ आगे की जांच जारी है। साथ ही, फर्जी ऐप और प्लेटफॉर्म को बंद करने और ब्लॉक करने के लिए तकनीकी कदम भी उठाए गए हैं।
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड आम जनता के लिए गंभीर खतरा हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग ऐप या ग्रुप में पैसा डालने से पहले पूरी तरह जांच करें। संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और किसी भी अनजान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अपराध में गिरोह का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए तकनीकी जांच और डेटा विश्लेषण बहुत जरूरी है। इस मामले में पुलिस ने यही तरीका अपनाया और आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई ने दिखा दिया कि कड़ी पुलिस कार्रवाई और डिजिटल जांच से बड़े साइबर अपराधियों का नेटवर्क भी तोड़ा जा सकता है। यह मामला आम लोगों को सावधान करने के लिए एक चेतावनी भी है कि वे ऑनलाइन निवेश और डिजिटल लेनदेन में सतर्क रहें और बिना जांच के किसी भी प्लेटफॉर्म पर पैसा न डालें।
इस तरह, दिल्ली पुलिस की यह कार्यवाही साइबर अपराध के खिलाफ एक सफल पहल के रूप में देखी जा रही है, जिसने फर्जी ट्रेडिंग ऐप और ग्रुप के जरिए चल रहे मल्टी‑क्रोर फ्रॉड को उजागर किया और अपराधियों को न्याय के सामने खड़ा किया।
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