Last updated: December 30th, 2025 at 08:32 am

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर देश की संसदीय परंपराओं का गवाह बनने जा रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जानकारी दी है कि 19 से 21 जनवरी तक लखनऊ में देश की सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों के अध्यक्षों व सभापतियों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करने से जुड़े अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
विधानभवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सतीश महाना ने बताया कि इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 31 विधानसभा अध्यक्ष हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही छह राज्यों- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के सभापति भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन न केवल संसदीय अनुभवों के आदान-प्रदान का मंच बनेगा, बल्कि विधायी कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा।
सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला करेंगे, जबकि 21 जनवरी को इसका समापन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी इस सम्मेलन में उपस्थिति रहेगी, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है। सम्मेलन के बाद 22 जनवरी को सभी पीठासीन अधिकारियों को अयोध्या भ्रमण कराया जाएगा, जिसे भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर माना जा रहा है।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि 19 से 24 दिसंबर तक चले इस सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही एक बार भी स्थगित नहीं हुई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। पूरे सत्र के दौरान सभी निर्धारित विधायी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
महाना के अनुसार, शीतकालीन सत्र में सदन की कुल कार्यवाही 24 घंटे 50 मिनट तक चली। इस दौरान कुल 2776 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 1 अल्पसूचित तारांकित प्रश्न, 451 तारांकित प्रश्न और 1842 अतारांकित प्रश्न शामिल थे। खास बात यह रही कि कुल प्रश्नों में से 95.46 प्रतिशत यानी 2650 प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से विधायकों द्वारा भेजे गए। ये सभी प्रश्न पब्लिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराए गए, जिससे पारदर्शिता और जनता की भागीदारी को बढ़ावा मिला।
उन्होंने आगे बताया कि सत्र के दौरान सदन में कुल 408 याचिकाएं प्राप्त हुईं। वहीं तृतीय सत्र में नियम-311 के अंतर्गत कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। शीतकालीन सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी पारित किया गया, जो राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन और शीतकालीन सत्र की उपलब्धियां उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यक्षमता, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। लखनऊ में होने वाला यह राष्ट्रीय सम्मेलन देशभर की विधायी संस्थाओं के लिए एक नई दिशा और साझा सोच का मंच बनने जा रहा है।
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