Last updated: December 31st, 2025 at 05:46 am

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद मंगलवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर पहली कोर कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। बैठक के बाद से ही संगठन और प्रदेश मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक मकर संक्रांति के बाद प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है। माना जा रहा है कि कुछ नेताओं को संगठन से सरकार में और कुछ को सरकार से संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह बदलाव केवल औपचारिक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री बनाए गए थे, जबकि 6 पद पहले से खाली थे। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव के बाद दो मंत्रियों जितेंद्र प्रसाद और अनूप प्रधान को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया। ऐसे में प्रदेश मंत्रिमंडल में कई पद अब भी रिक्त हैं, जिन्हें भरने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
चर्चा है कि प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को नई मंत्रिमंडल टीम में जगह मिल सकती है। इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने और संगठन के कुछ चेहरों को सरकार में शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है। कुछ राज्य मंत्रियों का कद बढ़ाकर उन्हें स्वतंत्र प्रभार भी दिया जा सकता है। साथ ही, बोर्ड और निगमों में भी कई नए चेहरों के समायोजन की संभावना है।
क्षेत्रीय संतुलन भी इस संभावित बदलाव का एक बड़ा आधार माना जा रहा है। चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं, ऐसे में पश्चिमी यूपी की भागीदारी बढ़ाए जाने की अटकलें तेज हैं। माना जा रहा है कि पश्चिमी यूपी से कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन साधा जा सके।
इसके साथ ही हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक का असर भी इन बदलावों में दिख सकता है। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि ब्राह्मण समुदाय के प्रतिनिधित्व को और मजबूत किया जाए, ताकि सामाजिक समीकरणों को बेहतर तरीके से साधा जा सके।
कुल मिलाकर, भाजपा का फोकस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसी मजबूत टीम तैयार करने पर है, जो संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी बनाए रखे। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ती है, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव की जमीन तैयार हो चुकी है।
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