Last updated: December 31st, 2025 at 09:46 am

गिग वर्कर्स यूनियन ने देशभर में हड़ताल बुलाने की घोषणा की है। इस हड़ताल का असर खासतौर पर बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। फूड डिलीवरी, ग्रोसरी डिलीवरी और अन्य ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि गिग वर्कर्स लंबे समय से असुरक्षित कामकाजी हालात और अनिश्चित आय की समस्या झेल रहे हैं।
गिग वर्कर्स वे कर्मचारी होते हैं जो मोबाइल ऐप्स के जरिए काम करते हैं। इनमें खाना पहुंचाने वाले, सामान डिलीवर करने वाले और कैब चलाने वाले लोग शामिल हैं। ये लोग नियमित नौकरी की तरह स्थायी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि हर ऑर्डर या ट्रिप के हिसाब से भुगतान पाते हैं। यूनियन का आरोप है कि कंपनियां इन्हें कर्मचारी का दर्जा नहीं देतीं, जिससे इन्हें कई जरूरी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
यूनियन की सबसे बड़ी मांग यह है कि गिग वर्कर्स को बुनियादी श्रम अधिकार दिए जाएं। इसमें न्यूनतम आय की गारंटी, काम के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा शामिल है। यूनियन का कहना है कि कई बार डिलीवरी के दौरान हादसे हो जाते हैं, लेकिन कंपनियां जिम्मेदारी लेने से बचती हैं। ऐसे में घायल कर्मचारी को खुद ही इलाज का खर्च उठाना पड़ता है।
दिल्ली में इस हड़ताल का असर फूड और ग्रोसरी डिलीवरी सेवाओं पर पड़ सकता है। हड़ताल के दिन कई इलाकों में ऑर्डर देर से पहुंचने या पूरी तरह बंद होने की संभावना है। यूनियन ने सभी गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। उनका कहना है कि जब तक सरकार और कंपनियां उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
गिग वर्कर्स का यह भी कहना है कि काम के घंटे तय नहीं होते। कई बार उन्हें बहुत कम पैसों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। प्रोत्साहन और बोनस की शर्तें भी अक्सर बदल दी जाती हैं, जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ता है। यूनियन का मानना है कि पारदर्शी नियम और स्थिर नीति के बिना गिग वर्कर्स का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
वहीं, आम लोगों को भी इस हड़ताल के कारण कुछ असुविधा हो सकती है। खासकर वे लोग जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों लोगों की स्थिति पर ध्यान खींचने का एक बड़ा कदम है।
कुल मिलाकर, गिग वर्कर्स यूनियन की यह हड़ताल केवल वेतन की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थायी अधिकारों की लड़ाई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और कंपनियां इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं और क्या गिग वर्कर्स की स्थिति में कोई ठोस सुधार होता है या नहीं।
![]()
No Comments