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केजीएमयू यौन शोषण मामला: रेजीडेंट डॉक्टर पर गैर-जमानती वारंट, आरोपी अब भी फरार

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में यौन शोषण और
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लखनऊ।

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    किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के आरोपों का सामना कर रहे रेजीडेंट डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। इसके बावजूद आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में अलग-अलग जगहों पर दबिश दे चुकी हैं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

    कोर्ट का सख्त रुख, आरोपी पर शिकंजा कसता हुआ

    पुलिस ने जिला कोर्ट में गैर-जमानती वारंट के लिए आवेदन किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, बृहस्पतिवार को पीड़िता का मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया गया, जिसमें उसने एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों को दोहराया। कोर्ट के इस कदम को मामले की गंभीरता के रूप में देखा जा रहा है।

    तीन राज्यों में तलाश, मोबाइल बना चुनौती

    आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उत्तराखंड के खटीमा, उत्तर प्रदेश के बरेली समेत कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। हालांकि, रमीज मलिक का मोबाइल फोन लगातार बंद जा रहा है, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करने में दिक्कत आ रही है। पुलिस अब उसके करीबियों के फोन की भी निगरानी कर रही है, ताकि किसी तरह का सुराग मिल सके।

    गिरफ्तारी नहीं तो कुर्की की तैयारी

    इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय ने साफ कहा है कि अगर गैर-जमानती वारंट के बावजूद आरोपी पुलिस के सामने पेश नहीं होता, तो उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी। यानी अब यह मामला सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून आरोपी पर और सख्ती बरतने के मूड में है।

    पीड़िता की आपबीती: भरोसे से ब्लैकमेल तक

    मामले की शुरुआत केजीएमयू की एक महिला रेजीडेंट डॉक्टर की शिकायत से हुई। पीड़िता के मुताबिक, रमीज मलिक से उसकी दोस्ती थी। अगस्त में आरोपी उसके किराए के कमरे पर आया और शादी का झांसा देकर उसके साथ यौन शोषण किया। सितंबर में जब पीड़िता को अपनी गर्भावस्था का पता चला, तो आरोपी ने दवा देकर गर्भपात करा दिया।

    धर्म परिवर्तन का दबाव और मानसिक प्रताड़ना

    पीड़िता का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि रमीज पहले से शादीशुदा है और उसने एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया था। जब पीड़िता ने उससे सवाल किए, तो उस पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और ब्लैकमेल किया गया। लगातार मानसिक तनाव और डर के बीच जी रही पीड़िता ने 17 दिसंबर की सुबह दवाओं की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया।

    सिर्फ एक मामला नहीं, बड़ा सवाल

    यह मामला सिर्फ एक महिला डॉक्टर की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे, पेशे की गरिमा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे बड़े सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।

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