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मौत ने भी जुदा नहीं किया: जब पति के साथ पत्नी ने भी तोड़ दी सांसों की डोर

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की उस गहराई
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की उस गहराई की कहानी है, जहां प्रेम आखिरी सांस तक साथ निभाता है। नगर पंचायत पनियरा के वार्ड नंबर 10, दीन दयाल नगर में रहने वाले लालमन सिंह और उनकी पत्नी रूमाली देवी ने उस कहावत को सच कर दिखाया, जिसमें कहा जाता है कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं।

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    बीमारी, रात की नींद और खामोश विदाई

    70 वर्षीय लालमन सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बुधवार रात उन्होंने रोज़ की तरह खाना खाया और सो गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी ज़िंदगी की आखिरी रात होगी। नींद के दौरान ही उनकी सांसें थम गईं। पास में सो रहीं उनकी पत्नी रूमाली देवी को सुबह जब कोई हलचल महसूस नहीं हुई, तो उन्होंने पति को जगाने की कोशिश की।

    सदमे ने छीन ली दूसरी जान

    पति को मृत अवस्था में देखकर रूमाली देवी खुद को संभाल नहीं सकीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह फूट-फूटकर रोने लगीं और जोर-जोर से चिल्लाईं। पति के वियोग का यह सदमा उनके दिल पर इस कदर भारी पड़ा कि कुछ ही पलों में उनकी भी धड़कनें थम गईं। परिजन जब तक उन्हें संभाल पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    एक घर, दो मौतें और मातम

    एक ही घर में पति-पत्नी की एक साथ मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लालमन सिंह और रूमाली देवी अपने पीछे तीन बेटे—जगदीश, प्रदीप और संदीप—का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। मोहल्ले में मातम पसर गया। हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही बात—इतना गहरा प्रेम शायद ही किसी को नसीब हो।

    एक ही चिता, आखिरी साथ

    इस दंपत्ति की अंतिम विदाई भी उनकी ज़िंदगी की तरह ही अनोखी रही। भौराबारी पुल के पास रोहिन नदी के तट पर दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। जब एक साथ दोनों की अर्थी उठी, तो मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी घटना पहले कभी नहीं देखी।

    इलाके में चर्चा और सम्मान

    पूरे इलाके में इस घटना की चर्चा है। लोग इसे ईश्वर का विशेष आशीर्वाद मान रहे है, जहां जीवनसाथी का साथ आखिरी सफर तक बना रहे। यह कहानी याद दिलाती है कि रिश्ते सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होते, बल्कि एक-दूसरे के बिना जी न पाने की भावना का नाम होते हैं।

    यह घटना भले ही दुखद हो, लेकिन इसमें छुपा प्रेम, समर्पण और अटूट साथ हर किसी के दिल को छू जाता है। लालमन सिंह और रूमाली देवी की कहानी अब सिर्फ उनके परिवार की नहीं रही, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेम की एक अमिट मिसाल बन चुकी है।

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