पहलगाम आतंकी हमले को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में आखिरकार लोकगायिका और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली नेहा सिंह राठौर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं। पुलिस के सामने उन्होंने अपने बयान दर्ज कराए। थाने में करीब एक घंटे तक चली पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनसे कई सवाल पूछे, जिनका नेहा ने सहयोग करते हुए जवाब दिया। बयान दर्ज कराने के बाद वह अपने पति हिमांशु सिंह के साथ वापस लौट गईं।
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क्यों पहुंचीं नेहा सिंह राठौर थाने?
दरअसल, नेहा सिंह राठौर के खिलाफ हजरतगंज थाने में दर्ज मुकदमे में पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के तहत उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए थाने बुलाया गया था। नेहा ने पुलिस को बताया कि उन्हें करीब दो हफ्ते पहले नोटिस मिला था, लेकिन तब उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। गले में गंभीर दिक्कत और बुखार के कारण वह समय पर उपस्थित नहीं हो सकीं।
पुलिस ने क्या सवाल पूछे?
पूछताछ के दौरान पुलिस ने यह जानना चाहा कि कोर्ट से अंतरिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद भी उन्होंने नोटिस पर अपना पक्ष क्यों नहीं रखा। महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में हुई इस पूछताछ में नेहा ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया। इसके बाद पुलिस ने उनसे मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि उनकी बीमारी की पुष्टि की जा सके।
थाने से बाहर क्या बोलीं नेहा?
बयान दर्ज कराने के बाद थाने से बाहर निकलते ही नेहा सिंह राठौर ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर जो मुकदमे दर्ज हुए हैं, उसी सिलसिले में उन्हें बयान दर्ज कराने बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस के सवालों का उन्होंने पूरा सहयोग करते हुए जवाब दिया है और अब वह वापस जा रही हैं।
27 अप्रैल को दर्ज हुआ था मुकदमा
नेहा सिंह राठौर के खिलाफ 27 अप्रैल को लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह शिकायत वुडलैंड पैराडाइज निवासी अभय प्रताप सिंह उर्फ अभय सिंह निर्भीक ने दर्ज कराई थी। इसके अलावा दुर्विजयगंज के हिमांशु वर्मा, दुगावां के अर्जुन गुप्ता और रानीगंज के सौरभ ने भी प्रार्थनापत्र दिए थे, जिन्हें इसी मामले में शामिल कर लिया गया।
बनारस के लंका थाने में भी मामला दर्ज
यह पहला मामला नहीं है। नेहा सिंह राठौर के खिलाफ बनारस के लंका थाने में भी पिछले साल अप्रैल में भड़काऊ पोस्ट और संदेश साझा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। उस मामले में वह अब तक कोर्ट में बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचीं। नोटिस का जवाब न मिलने पर नवंबर में पुलिस ने उनके सुशांत गोल्फ सिटी स्थित फ्लैट पर दबिश भी दी थी और नोटिस चस्पा किया गया था।
यह पूरा मामला अभिव्यक्ति की आज़ादी, कानून और जिम्मेदारी के बीच की जटिल बहस को एक बार फिर सामने लाता है, जहां हर कदम कानूनी दायरे में रहकर उठाया जाना अब नेहा सिंह राठौर के लिए बेहद अहम हो गया है।
पहलगाम टिप्पणी विवाद: बयान दर्ज कराने हजरतगंज पहुंचीं नेहा सिंह राठौर, पुलिस ने मांगी मेडिकल रिपोर्ट
Last updated: January 4th, 2026 at 01:12 pm
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में आखिरकार लोकगायिका और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली नेहा सिंह राठौर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं। पुलिस के सामने उन्होंने अपने बयान दर्ज कराए। थाने में करीब एक घंटे तक चली पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनसे कई सवाल पूछे, जिनका नेहा ने सहयोग करते हुए जवाब दिया। बयान दर्ज कराने के बाद वह अपने पति हिमांशु सिंह के साथ वापस लौट गईं।
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क्यों पहुंचीं नेहा सिंह राठौर थाने?
दरअसल, नेहा सिंह राठौर के खिलाफ हजरतगंज थाने में दर्ज मुकदमे में पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के तहत उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए थाने बुलाया गया था। नेहा ने पुलिस को बताया कि उन्हें करीब दो हफ्ते पहले नोटिस मिला था, लेकिन तब उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। गले में गंभीर दिक्कत और बुखार के कारण वह समय पर उपस्थित नहीं हो सकीं।
पुलिस ने क्या सवाल पूछे?
पूछताछ के दौरान पुलिस ने यह जानना चाहा कि कोर्ट से अंतरिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद भी उन्होंने नोटिस पर अपना पक्ष क्यों नहीं रखा। महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में हुई इस पूछताछ में नेहा ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया। इसके बाद पुलिस ने उनसे मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि उनकी बीमारी की पुष्टि की जा सके।
थाने से बाहर क्या बोलीं नेहा?
बयान दर्ज कराने के बाद थाने से बाहर निकलते ही नेहा सिंह राठौर ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर जो मुकदमे दर्ज हुए हैं, उसी सिलसिले में उन्हें बयान दर्ज कराने बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस के सवालों का उन्होंने पूरा सहयोग करते हुए जवाब दिया है और अब वह वापस जा रही हैं।
27 अप्रैल को दर्ज हुआ था मुकदमा
नेहा सिंह राठौर के खिलाफ 27 अप्रैल को लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह शिकायत वुडलैंड पैराडाइज निवासी अभय प्रताप सिंह उर्फ अभय सिंह निर्भीक ने दर्ज कराई थी। इसके अलावा दुर्विजयगंज के हिमांशु वर्मा, दुगावां के अर्जुन गुप्ता और रानीगंज के सौरभ ने भी प्रार्थनापत्र दिए थे, जिन्हें इसी मामले में शामिल कर लिया गया।
बनारस के लंका थाने में भी मामला दर्ज
यह पहला मामला नहीं है। नेहा सिंह राठौर के खिलाफ बनारस के लंका थाने में भी पिछले साल अप्रैल में भड़काऊ पोस्ट और संदेश साझा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। उस मामले में वह अब तक कोर्ट में बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचीं। नोटिस का जवाब न मिलने पर नवंबर में पुलिस ने उनके सुशांत गोल्फ सिटी स्थित फ्लैट पर दबिश भी दी थी और नोटिस चस्पा किया गया था।
यह पूरा मामला अभिव्यक्ति की आज़ादी, कानून और जिम्मेदारी के बीच की जटिल बहस को एक बार फिर सामने लाता है, जहां हर कदम कानूनी दायरे में रहकर उठाया जाना अब नेहा सिंह राठौर के लिए बेहद अहम हो गया है।
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