Last updated: January 5th, 2026 at 12:36 pm

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी पीडीए पंचांग-2026 का विमोचन केवल एक पंचांग जारी करने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह समाजवादी विचारधारा, सामाजिक स्मृति और आने वाले राजनीतिक संघर्षों की दिशा को रेखांकित करने वाला एक अहम कदम भी माना जा रहा है। इस पंचांग का प्रकाशन समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने किया है।
पीडीए समाज के नायकों को याद करने की पहल
इस पंचांग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। अक्सर इतिहास की मुख्यधारा में जिन नायकों को सीमित जगह मिलती है, यह पंचांग उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाता है। यह समाज को अपने संघर्षशील पुरखों को याद करने और उनके विचारों से प्रेरणा लेने का अवसर देता है।
केवल तिथियां नहीं, सामाजिक चेतना का दस्तावेज
पीडीए पंचांग-2026 सिर्फ पर्व-त्योहार, व्रत या तिथियों की जानकारी तक सीमित नहीं है। इसमें राष्ट्रीय पर्वों, ऐतिहासिक दिवसों, सामाजिक आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण दिन और रोजमर्रा की जरूरत के उपयोगी कॉलम भी शामिल हैं। यही वजह है कि यह पंचांग एक सामान्य कैलेंडर से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक चेतना को मजबूत करने वाला दस्तावेज बन जाता है।
विमोचन कार्यक्रम में क्या रहा खास
पंचांग विमोचन कार्यक्रम के दौरान समाजवादी आंदोलन की विरासत, पीडीए समाज के योगदान और भविष्य की सामाजिक दिशा पर विस्तार से चर्चा हुई। इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए समाज की एकता, चेतना और अधिकारों की लड़ाई हमेशा से समाजवादी आंदोलन की आत्मा रही है। उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि सपा की राजनीति का केंद्र अब और स्पष्ट रूप से सामाजिक न्याय के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है।
2027 की राजनीति से जुड़ता पंचांग
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए समीकरण के सकारात्मक नतीजों के बाद अखिलेश यादव इस सामाजिक गठजोड़ को लेकर और अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को एकजुट करने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं। ऐसे में पीडीए पंचांग-2026 को केवल एक सांस्कृतिक पहल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
यह पंचांग समाज को यह याद दिलाता है कि अधिकारों की लड़ाई सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सामाजिक स्मृति, पहचान और रोजमर्रा की चेतना से भी जुड़ी होती है। पीडीए पंचांग-2026 उसी चेतना को मजबूत करने की एक कोशिश है, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी गूंज छोड़ सकती है।
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