Last updated: January 5th, 2026 at 04:13 pm

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS ने मरीजों के इलाज को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। इस नए निर्णय के तहत अब गंभीर और रेफरल मरीजों को इलाज में प्राथमिकता दी जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन मरीजों को अन्य अस्पतालों से AIIMS भेजा जाएगा, उनका इलाज पहले किया जाएगा। यह फैसला अस्पताल में बढ़ती भीड़ और गंभीर मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
AIIMS देश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल है। यहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग यहां इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। मरीजों की इतनी ज्यादा संख्या होने के कारण डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के संसाधनों पर काफी दबाव रहता है। कई बार गंभीर हालत वाले मरीजों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह नया फैसला लिया गया है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से उन मरीजों को तुरंत इलाज मिल सकेगा जिनकी हालत ज्यादा गंभीर है। रेफरल मरीज वे होते हैं जिन्हें पहले किसी दूसरे अस्पताल में दिखाया जाता है और वहां से बेहतर इलाज के लिए AIIMS भेजा जाता है। ऐसे मरीजों को समय पर इलाज मिलना बहुत जरूरी होता है। नए नियम से डॉक्टरों को भी यह तय करने में आसानी होगी कि किस मरीज को पहले देखना है।
हालांकि इस फैसले का असर सामान्य मरीजों पर भी पड़ेगा। जो मरीज गंभीर स्थिति में नहीं हैं या सीधे ओपीडी में आते हैं, उन्हें इलाज के लिए कुछ ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। अस्पताल प्रशासन ने साफ किया है कि सामान्य मरीजों का इलाज बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन प्राथमिकता गंभीर मरीजों को दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसी के साथ भेदभाव करना नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों का सही उपयोग करना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, इसलिए प्राथमिकता तय करना जरूरी हो जाता है। अगर गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
AIIMS प्रशासन ने मरीजों और उनके परिजनों से सहयोग की अपील की है। अस्पताल का कहना है कि यह बदलाव मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज के लिए किया गया है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुधार भी किए जाएंगे, ताकि हर मरीज को सही समय पर उचित इलाज मिल सके।
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