Last updated: January 6th, 2026 at 04:38 pm

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव से जुड़े अधिकारियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने की इस प्रक्रिया से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं सरकार और प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से की गई है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटने का असर सीधे तौर पर आम लोगों के वोट के अधिकार पर पड़ता है। उनका कहना है कि कई ऐसे मतदाता हैं जो पूरी तरह पात्र हैं, फिर भी उनके नाम सूची से गायब पाए गए हैं। विपक्ष का यह भी कहना है कि अगर समय रहते इन गलतियों को नहीं सुधारा गया, तो चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में लोग मतदान से वंचित रह सकते हैं।
इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि मतदाता सूची की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह के बदलाव लोगों के मन में संदेह पैदा करते हैं। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में सुधार के लिए आम लोगों को पर्याप्त जानकारी और समय नहीं दिया गया, जिससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को ज्यादा परेशानी हो रही है।
दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत यह प्रक्रिया की गई है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है। उनके अनुसार, मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों और दो जगह दर्ज नामों को हटाना जरूरी था, ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो।
सरकार का यह भी कहना है कि अभी जो सूची जारी की गई है, वह केवल ड्राफ्ट है, अंतिम नहीं। जिन लोगों के नाम हटे हैं या जिनकी जानकारी गलत है, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने और सुधार का पूरा मौका दिया गया है। इसके लिए तय समय सीमा और आसान प्रक्रिया रखी गई है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता बाहर न रह जाए।
इस पूरे विवाद के बीच आम जनता भी असमंजस में है। कई लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका नाम मतदाता सूची में है या नहीं। कुछ जगहों पर लोग प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। इससे साफ है कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सीधे आम नागरिकों से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़ा मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहता है, खासकर जब चुनाव नजदीक हों। विपक्ष का विरोध और सरकार का बचाव, दोनों ही लोकतंत्र का हिस्सा हैं। जरूरी यह है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले।
कुल मिलाकर, मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आपत्तियों के समाधान के बाद अंतिम सूची कितनी निष्पक्ष और भरोसेमंद बनती है, ताकि चुनाव पर जनता का विश्वास बना रहे।
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