Last updated: January 7th, 2026 at 12:47 pm

कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता को तेज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा। इसी दिशा में कांग्रेस ने दोनों राज्यों में नई समितियों के गठन और जनसभाओं के आयोजन की घोषणा की है।
पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ समय से संगठन में सुस्ती देखने को मिल रही थी, जिसे दूर करना जरूरी है। इसलिए अब जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की योजना बनाई गई है। नई समितियों के जरिए स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि वे सीधे जनता से जुड़ सकें।
दिल्ली में कांग्रेस खास तौर पर शहरी मुद्दों को लेकर सक्रिय हो रही है। महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर पार्टी जनसभाओं और बैठकों का आयोजन करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों की समस्याओं को मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब माँगा जाएगा।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है। पार्टी की योजना है कि गांवों और कस्बों में जनसभाएँ कर लोगों से सीधा संवाद किया जाए। इसके अलावा युवाओं, महिलाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि इससे जनता के बीच कांग्रेस की मौजूदगी फिर से मजबूत होगी।
नई समितियों के गठन का मकसद संगठन में नई ऊर्जा लाना है। इनमें पुराने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवाओं को भी जगह दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि युवा कार्यकर्ता संगठन को नई दिशा दे सकते हैं और सोशल मीडिया तथा जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा है कि जनसभाओं के जरिए सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही जनता को यह बताया जाएगा कि कांग्रेस की सोच और योजनाएँ क्या हैं। पार्टी चाहती है कि लोग उसे एक मजबूत विकल्प के रूप में देखें।
दिल्ली और यूपी में सक्रियता बढ़ाने के पीछे एक बड़ा कारण आगामी चुनाव भी हैं। पार्टी नेतृत्व मानता है कि समय रहते तैयारी शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसलिए संगठन को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस की दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता यह दिखाती है कि पार्टी खुद को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। नई समितियाँ और जनसभाएँ संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
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