Last updated: January 7th, 2026 at 01:57 pm

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी की मौजूदगी को लेकर चल रही अटकलों पर अब दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दी है।
सांसद की मौजूदगी पर पुलिस का बयान
जॉइंट सीपी (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सांसद मोहिबुल्लाह नदवी घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन जब तक हिंसा और तोड़फोड़ शुरू हुई, उससे पहले ही वे वहां से जा चुके थे। पुलिस इस पहलू की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी तरह की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
तुर्कमान गेट पर हुई पत्थरबाज़ी और हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इनमें धारा 121, 123, 221, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने वाले अधिनियम की धारा 3 और धारा 191 (दंगा) शामिल हैं। अब तक मौके से पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि करीब 15 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
बॉडी कैमरा और वीडियोग्राफी बने अहम सबूत
पुलिस के मुताबिक, जांच को मजबूत बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बॉडी-बोर्न कैमरों की फुटेज और घटनास्थल की वीडियोग्राफी के जरिए सबूत जुटाए जा रहे हैं। स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और हर एंगल से तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
सोशल मीडिया वीडियो भी जांच के घेरे में
जॉइंट सीपी मधुर वर्मा ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो पुलिस के संज्ञान में आए हैं। इन वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोगों को भीड़ को उकसाते हुए देखा गया है। पुलिस ने साफ किया है कि ऐसे वीडियो पोस्ट करने वालों को जांच के तहत बुलाया जाएगा और उनसे पूछताछ की जाएगी। यदि किसी की भूमिका साजिश में साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
फिलहाल पुलिस सभी हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ पूरी होने और सबूतों के विश्लेषण के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। तुर्कमान गेट की यह घटना न सिर्फ प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर थोड़ी सी चूक कैसे हिंसा में बदल सकती है।
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