Last updated: January 8th, 2026 at 03:27 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर वोटर लिस्ट के मुद्दे पर उबल रही है. एसआईआर प्रक्रिया के बाद सामने आए आंकड़ों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. करीब 2.89 करोड़ वोट कटने की खबर ने इस प्रक्रिया को सिर्फ प्रशासनिक कवायद नहीं रहने दिया, बल्कि इसे सीधी राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है. एक तरफ समाजवादी पार्टी सवाल खड़े कर रही है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी संगठन को और धार देने में जुट गई है.
आंकड़ों ने बदला सियासी माहौल
नए आंकड़ों के सामने आते ही सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक्शन मोड में दिखे. उन्होंने ‘पीडीए प्रहरी’ का आह्वान करते हुए हर वोट बचाने की मुहिम छेड़ दी. उनका साफ कहना है कि यह मामला सिर्फ वोट कटने का नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों पर सीधा असर डालने वाला है. दूसरी ओर बीजेपी ने भी इसे गंभीरता से लिया और संगठन स्तर पर बड़ा अभियान शुरू कर दिया.
बीजेपी का बूथ स्तर मिशन
एसआईआर के बाद बीजेपी नेतृत्व ने तेजी से मोर्चा संभाला. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर बूथ पर वोट बढ़ाए जाएं. नए नियमों के तहत एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रह सकते हैं, ऐसे में बूथों का पुनर्गठन और संगठन की मजबूती पर खास जोर दिया जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने हर बूथ पर 100 से 200 नए वोट जोड़ने का लक्ष्य तय किया है. अगले एक महीने तक यह अभियान चलेगा, जिसमें विधायक, सांसद, जिला अध्यक्ष और क्षेत्रीय अध्यक्ष सभी की जिम्मेदारी तय की गई है. यूपी के 1,77,516 बूथों पर यह रणनीति पूरी ताकत से लागू की जा रही है.
अखिलेश यादव के सवाल और चेतावनी
वहीं अखिलेश यादव ने एसआईआर के आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीडीए समाज और पीडीए प्रहरी से अपील की कि वोट कटने की किसी भी साजिश को सफल न होने दिया जाए. उनका दावा है कि तमाम प्रयासों के बावजूद पीडीए समाज के करोड़ों वोट कट चुके हैं, जो बेहद चिंताजनक है.
“वोट सिर्फ चुनाव नहीं, पहचान है”
अखिलेश यादव का कहना है कि वोटर लिस्ट में नाम होना सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक होने की बुनियादी पहचान है. उन्होंने आशंका जताई कि अगर नाम वोटर लिस्ट से गायब हुआ, तो भविष्य में राशन कार्ड, सरकारी योजनाएं, जाति प्रमाणपत्र, नौकरी, आरक्षण, बैंक खाते, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस और जमीन-जायदाद तक पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं.
उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो सरकार निर्विरोध चुनाव करा सकती है, वह वोट कटवाने के लिए भी किसी हद तक जा सकती है. उनके मुताबिक यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि संविधान, अधिकार और भविष्य बचाने की है.
वोट और वजूद की लड़ाई
अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बार गरीब, शोषित और वंचित वर्ग ही सबसे ज्यादा नुकसान झेलता है. इसलिए हर मतदाता को सजग रहना होगा, अपना वोट सुरक्षित करना होगा और अपनी नागरिक पहचान बचानी होगी. यूपी में अब यह साफ हो चुका है कि यह सिर्फ चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि वोट और वजूद की जंग है, जहां हर एक वोट की कीमत तय करेगी आने वाली सियासत.
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