Last updated: January 14th, 2026 at 08:50 am

संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी CJM कोर्ट के आदेश ने प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। कोर्ट ने ASP अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। लेकिन इस आदेश के तुरंत बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
CJM का आदेश और प्रशासन की आपत्ति
CJM संभल ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जो घायल युवक आलम के पिता यामीन ने दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सर्वे के दौरान पुलिस ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की, जिससे उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए FIR दर्ज करने के निर्देश दिए।
हालांकि, संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने साफ कहा है कि फिलहाल किसी भी पुलिसकर्मी पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। प्रशासन इस आदेश को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख करेगा।
क्या है पूरा विवाद
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान इलाके में तनाव का माहौल था। इसी बीच हिंसा भड़क उठी और आलम नाम के युवक को गोली लग गई। परिवार का कहना है कि आलम ठेला लेकर घर से निकला था और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। वहीं, पुलिस पक्ष का दावा है कि हालात बेकाबू हो रहे थे और स्थिति संभालने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। यही विरोधाभासी दावे अब कानूनी बहस का आधार बन चुके हैं।
पहले ही हो चुकी है न्यायिक जांच
एसपी केके बिश्नोई के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है। जिन पुलिसकर्मियों के नाम कोर्ट के आदेश में शामिल हैं, उनकी भूमिका की जांच पूरी कर ली गई है। प्रशासन का तर्क है कि जब एक बार जांच हो चुकी है, तो बिना नए ठोस आधार के FIR दर्ज करना उचित नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या CJM के आदेश को हाईकोर्ट में राहत मिलती है या पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
कौन हैं ASP अनुज चौधरी
अनुज चौधरी सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि देश के जाने-माने पहलवान भी रहे हैं। मुजफ्फरनगर के बधेरी गांव में जन्मे अनुज चौधरी ने गुरु हनुमान अखाड़े में प्रशिक्षण लिया और राष्ट्रीय व पुलिस खेलों में कई स्वर्ण पदक जीते। उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार, अर्जुन अवॉर्ड, यश भारती सम्मान और मान्यवर काशीराम पुरस्कार जैसे बड़े सम्मान मिल चुके हैं। साल 2000 में खेल कोटे से यूपी पुलिस में भर्ती होकर उन्होंने सब इंस्पेक्टर से ASP तक का सफर तय किया। फिलहाल वे फिरोजाबाद में ASP के पद पर तैनात हैं। इस पूरे मामले ने कानून, न्याय और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर है। क्या कोर्ट प्रशासन की दलीलों को स्वीकार करेगा या CJM का आदेश बरकरार रहेगा इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
फिलहाल, संभल हिंसा का यह मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।
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