
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से आई यह खबर दिल को झकझोर देने वाली है। ठंड से राहत पाने के लिए की गई एक छोटी-सी लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे मातम में बदल दिया। छजलैट थाना इलाके में कमरे के भीतर जल रही कोयले की अंगीठी से निकली जहरीली गैस ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
एक रात, जो कभी सुबह नहीं बन पाई
हरिद्वार हाइवे पर छजलैट के रहने वाले जावेद पेट्रोल पंप के पास चाय की दुकान चलाते हैं। गुरुवार रात वह अपनी पत्नी शाहिस्ता और तीन बच्चों शिफान, आहिल और आयरा के साथ कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए। कड़ाके की ठंड में यह आम बात थी, लेकिन यही अंगीठी उस रात मौत का कारण बन गई।
सुबह की खामोशी और अनहोनी का अहसास
शुक्रवार सुबह जब काफी देर तक जावेद के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो पास में सो रहे भतीजे आमिर और साले सलाउद्दीन को चिंता हुई। दरवाजा खटखटाने पर काफी देर बाद जावेद ने लड़खड़ाते हुए किसी तरह कमरा खोला। सामने का मंजर भयावह था। पूरा कमरा कोयले की धुंध से भरा हुआ था और बेड पर पत्नी और तीनों बच्चे बेहोश पड़े थे।
अस्पताल पहुंचते-पहुंचते टूट गईं दो सांसें
परिजन आनन-फानन में सभी को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद आहिल और आयरा को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जावेद, उनकी पत्नी शाहिस्ता और बेटे शिफान की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।
घर में पसरा मातम
परिवार के सदस्य गयासुद्दीन के मुताबिक बाकी तीनों का इलाज जारी है। मासूम आहिल और आयरा की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। जिन बच्चों की किलकारियों से घर गुलजार रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा है। मां-बाप की आंखों के सामने बच्चों का यूं चले जाना किसी भी परिवार के लिए असहनीय दर्द है।
पुलिस जांच और शुरुआती निष्कर्ष
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती जांच में साफ हुआ है कि अंगीठी से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने से यह हादसा हुआ। बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, लेकिन अक्सर ठंड में लोग इस खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं।
एक दर्दनाक सबक
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। ठंड से बचने के लिए किए गए छोटे फैसले अगर सावधानी के बिना हों, तो उनकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ सकती है। मासूम आयरा और आहिल की यह कहानी हर घर तक यह संदेश पहुंचाती है कि सुरक्षा में की गई लापरवाही कभी भी जानलेवा बन सकती है।
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