Last updated: January 17th, 2026 at 09:11 am

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में कथित अवैध धर्मांतरण गतिविधियों के आरोपों ने शुक्रवार को तूल पकड़ लिया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ‘लव जिहाद बंद करो’ जैसे नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और केजीएमयू प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए और पूरे मामले की निष्पक्ष व तेज जांच की मांग की।
संदिग्ध गतिविधियों का आरोप
विहिप का आरोप है कि केजीएमयू परिसर में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समय रहते इन्हें रोकने में नाकाम रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित साजिश हो सकती है। इसी आशंका के चलते विहिप ने जांच को व्यापक दायरे में ले जाने की मांग की है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
विहिप के स्थानीय नेता विजय प्रताप ने विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से जांच तेज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने दावा किया कि विहिप और बजरंग दल के प्रयासों से ही इस कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामले दोबारा सामने आ सकते हैं। उन्होंने केजीएमयू के कुछ अधिकारियों को हटाने और पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने की भी मांग की।
नर्सिंग छात्रा से कथित शोषण का मामला
यह विरोध प्रदर्शन उस घटना के बाद हुआ, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। एक दिन पहले कैसरबाग पुलिस ने केजीएमयू के इंटर्न मोहम्मद आदिल को एक नर्सिंग छात्रा से कथित बलात्कार और ब्लैकमेल के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आदिल ने छात्रा से शादी का वादा किया, फिर उसका यौन शोषण किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी।
पुराने मामले से जुड़ने की जांच
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला पहले गिरफ्तार किए गए जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नाइक से जुड़ा है। डॉ. नाइक पर महिला डॉक्टर के यौन शोषण, जबरन गर्भपात कराने और धर्म बदलने का दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप हैं। पुलिस को शक है कि इन मामलों के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
जांच के घेरे में पूरा सिस्टम
उत्तर प्रदेश पुलिस इस पूरे प्रकरण को संभावित संगठित धर्मांतरण नेटवर्क के रूप में देख रही है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और नतीजे यह तय करेंगे कि यह मामला कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
![]()
Comments are off for this post.