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147 साल की विरासत, गंगा-जमुनी तहजीब और विकास का संगम: अलीगढ़ नुमाइश का भव्य शुभारंभ

ताले और तालीम के लिए पहचाने जाने वाले अलीगढ़ में आज उस परंपरा ने फिर से रौनक बिखेरी, जो शहर
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ताले और तालीम के लिए पहचाने जाने वाले अलीगढ़ में आज उस परंपरा ने फिर से रौनक बिखेरी, जो शहर की पहचान बन चुकी है। 147वीं औद्योगिक कृषि प्रदर्शनी, जिसे आम बोलचाल में अलीगढ़ की नुमाइश कहा जाता है, का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। प्रभारी मंत्री और गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कबूतर और गुब्बारे उड़ाकर तथा फीता काटकर इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन किया। नुमाइश मैदान में उमड़ी भीड़ और उत्साह ने बता दिया कि यह मेला सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि अलीगढ़ की आत्मा है।

Table of Contents

    146 साल पुराना इतिहास

    अलीगढ़ की नुमाइश का इतिहास 146 साल पुराना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1880 में ‘अलीगढ़ जिला मेला’ के नाम से हुई थी। उस दौर में यहां घोड़ों की प्रदर्शनी भी लगती थी, जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के घोड़े भी हिस्सा लेते थे। एएमयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. राहत अबरार के मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह नुमाइश केवल मनोरंजन का नहीं, बल्कि एकता और प्रतिरोध का मंच भी बनी। हिंदू, मुस्लिम और अन्य वर्गों के लोग यहां इकट्ठा होकर अंग्रेजों के खिलाफ एक स्वर में खड़े हुए। यही वजह है कि नुमाइश परिसर में मंदिर के साथ मस्जिद और श्मशान घाट के साथ कब्रिस्तान भी मौजूद है।

    सर सैयद अहमद खान का ऐतिहासिक योगदान

    6 फरवरी 1894 को एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने मोहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज फंड के लिए नुमाइश में एक नाटक का मंचन कराया था। उन्होंने यहां पुस्तक की एक दुकान भी स्थापित की, जिसके बाद से नुमाइश में किताबों की खरीदारी एक परंपरा बन गई। आज भी यहां भव्य मुज़म्मिल गेट खड़ा है, जिसका नाम एएमयू के तीसरे कुलपति नवाब मोहम्मद मुजम्मिल खान के नाम पर रखा गया है।

    गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत प्रतीक

    प्रभारी मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने नुमाइश को उत्तरी भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि उद्योग और कृषि के भविष्य का रास्ता भी दिखाती है। यहां देशभर के उद्योगपति अपने विचार साझा करते हैं, कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीकों और बीमारियों से बचाव की जानकारी देते हैं और ओडीओपी उत्पादों को मंच मिलता है।

    कश्मीर से कन्याकुमारी तक का भारत

    अलीगढ़ नुमाइश की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के घरेलू और औद्योगिक उत्पाद एक ही जगह देखने को मिलते हैं। अलग-अलग राज्यों और जिलों के उत्पादों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनता है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि पहले अलीगढ़ ‘ताला नगरी’ के नाम से जाना जाता था, लेकिन आज यह उद्योग और नवाचार की पहचान बन चुका है।

    एक महीने तक रहेगा उत्सव

    करीब एक महीने तक चलने वाली यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी 16 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी 2026 तक चलेगी। नुमाइश में विभिन्न मंचों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य और बॉलीवुड कलाकारों की प्रस्तुतियां भी होंगी। यह आयोजन बताता है कि अलीगढ़ की नुमाइश समय के साथ बदलते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है और निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रही है।

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