
उत्तर प्रदेश में खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में योगी सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। राज्य में पानी की बढ़ती कमी और किसानों की सिंचाई संबंधी चुनौतियों को देखते हुए, सरकार अब परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक माइक्रो इरिगेशन तकनीक को ज़मीन पर उतारने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग गोरखपुर और संतकबीर नगर में छह पायलट परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं।
क्या है माइक्रो इरिगेशन और क्यों है यह खास
माइक्रो इरिगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई, खेती में पानी के समझदारी भरे इस्तेमाल की तकनीक है। इन परियोजनाओं में PPIN (प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क) तकनीक अपनाई जा रही है, जिसमें नदियों या जलाशयों से पानी सीधे पाइप के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे खुले नालों या बाढ़ सिंचाई में होने वाली भारी पानी की बर्बादी रुकेगी। अनुमान है कि इस तकनीक से जल उपयोग की दक्षता लगभग 75 प्रतिशत तक बढ़ेगी, यानी कम पानी में अधिक फसल संभव होगी।
किसानों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा
इस नई व्यवस्था से किसानों को डीजल पंप या बिजली पर निर्भरता कम करनी होगी। पानी दबाव के साथ खेतों तक पहुंचेगा, जिससे सिंचाई आसान और सस्ती बनेगी। खास बात यह है कि रबी और खरीफ, दोनों फसलों के मौसम में किसानों को समय पर पानी मिल सकेगा। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता भी देगी, ताकि छोटे किसान भी इस बदलाव का हिस्सा बन सकें।
किन इलाकों में शुरू हो रही हैं परियोजनाएं
इन छह पायलट प्रोजेक्ट्स का कुल कमांड एरिया लगभग 2149 हेक्टेयर है। गोरखपुर जिले के बांसगांव, मलांव, मझगवां, राजधनी, बरगदवां और जंगल गौरी-1 क्लस्टर राप्ती नदी और रामगढ़ ताल क्षेत्र में विकसित किए जा रहे हैं। वहीं संतकबीर नगर में कुवानो नदी क्षेत्र के प्रजापतिपुर क्लस्टर को शामिल किया गया है। इन इलाकों में खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रही है, ऐसे में यह परियोजना किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
फरवरी 2026 तक संचालन का लक्ष्य
चार परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और शेष पर काम जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में सिंचाई व्यवस्था चालू हो जाए। खास बात यह है कि हर क्लस्टर में ‘वाटर यूजर सोसाइटी’ बनाई जाएगी, जहां किसान खुद इस नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सतत कृषि की ओर एक मजबूत कदम
“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की सोच के साथ शुरू की गई यह पहल न सिर्फ गिरते भूजल स्तर को रोकने में मदद करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को सतत कृषि के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि ये पायलट प्रोजेक्ट्स सफल रहे, तो आने वाले समय में यही मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
![]()
Comments are off for this post.