Last updated: January 25th, 2026 at 08:52 am
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हुए हंगामे को लेकर चुनाव आयोग की सख्ती के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का से टीएमसी विधायक मणिरुल इस्लाम के खिलाफ सुनवाई केंद्र में तोड़फोड़ और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आरोप है कि हाल ही में मतदाता सूची के ड्राफ्ट पर आपत्तियों की सुनवाई के दौरान विधायक अपने समर्थकों के साथ केंद्र पर पहुंचे और वहां हंगामा व तोड़फोड़ की। यह मामला राजनीतिक रूप से उस समय और संवेदनशील हो गया, जब चुनाव आयोग द्वारा तय समय सीमा के बावजूद कार्रवाई में देरी सामने आई।
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गुरुवार शाम तक विधायक के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर इसकी रिपोर्ट भेजी जाए। हालांकि, निर्धारित समय तक कार्रवाई न होने पर आयोग ने नाराजगी जताई। इसके बाद शनिवार को प्रशासन हरकत में आया और दोपहर बाद विधायक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मणिरुल इस्लाम ने खुद को निर्दोष बताया और आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि वे जनता की आवाज उठाते रहेंगे और यदि इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़े, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, विपक्षी भाजपा ने एफआईआर दर्ज होने का स्वागत करते हुए इसे देर से उठाया गया सही कदम बताया है। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच और विधायक की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा का कहना है कि इससे पहले 14 जनवरी को हुई घटना के बाद दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य आरोपियों के नाम न होने से संदेह और गहराया था।
कार्रवाई में देरी से आयोग नाराज, दो जिलों के अधिकारियों पर नजर
मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान हुई हिंसा को लेकर चुनाव आयोग ने राज्य के दो जिलों में प्रशासनिक ढिलाई पर असंतोष जताया है। सूत्रों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों की सुस्ती आयोग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
मुर्शिदाबाद के फरक्का के अलावा उत्तर दिनाजपुर के इटाहार में भी सुनवाई केंद्र पर तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी, लेकिन वहां से अब तक आयोग को विस्तृत रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। आयोग ने साफ कर दिया है कि सुनवाई केंद्रों पर किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर बाधाओं के बावजूद पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई जा रही है और संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग दोहराई है।
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