
रविवार को जीआईसी मैदान में आजाद समाज पार्टी की रैली ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर मंच से सीधे और तीखे अंदाज़ में बोले। उनका फोकस साफ था एकजुटता, हक की बात और सत्ता के विकल्प का दावा। रैली में बड़ी संख्या में जुटी भीड़ के सामने उन्होंने खासतौर पर मुसलमानों से साथ आने की अपील की और कहा कि अगर समाज एकजुट हो जाए, तो बदलाव दूर नहीं।
“15 दिन में माहौल बदल जाएगा”
मंच से चंद्रशेखर ने कहा कि मुसलमान आजाद समाज पार्टी के साथ खड़े हो जाएं, तो “15 दिन में माहौल बदलने वाला है।” उनका कहना था कि मौजूदा राजनीति लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली मुद्दे शिक्षा, रोजगार और इलाज हैं। उन्होंने दावा किया कि समाज अगर एकजुट रहा, तो प्रदेश में 300 सीटें जीतना मुमकिन है।
सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान पर सख्त बयान
रैली के दौरान चंद्रशेखर ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनी तो बहन-बेटियों की तरफ बुरी नजर रखने वालों को किसी लायक नहीं छोड़ा जाएगा। इस बयान पर मैदान में मौजूद समर्थकों ने जोरदार तालियों और नारों से समर्थन जताया। यह हिस्सा रैली का सबसे भावनात्मक और उग्र पल माना गया।
राशन नहीं, अधिकारों की राजनीति का दावा
चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मुफ्त राशन नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी सुविधाएं होंगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “पांच किलो राशन मिले या नहीं, लेकिन अच्छी शिक्षा, अच्छा उपचार और रोजगार जरूर मिलेगा।” उनका तर्क था कि जब इंसान पढ़ा-लिखा होगा, स्वस्थ होगा और काम होगा, तभी समाज सच में मजबूत बनेगा।
“अधिकारी सुनवाई करेंगे”
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में आम आदमी की सुनवाई नहीं होती। उन्होंने वादा किया कि आजाद समाज पार्टी की सरकार बनने पर अधिकारी जनता की बात सुनेंगे। साथ ही यह भी कहा कि अमीरों की तिजोरी से पैसा निकालकर गरीबों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि संसाधनों का सही बंटवारा हो सके।
मंच पर चढ़ने को लेकर अफरा-तफरी
रैली के अंत में अव्यवस्था भी देखने को मिली। मंच पर चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे मंच के बराबर बना गेट टूट गया। हालांकि इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं आई, लेकिन भीड़ और उत्साह का अंदाज़ा जरूर लगा।
जीआईसी मैदान की यह रैली सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं थी, बल्कि सत्ता, सम्मान और अधिकारों को लेकर एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश थी। चंद्रशेखर के बयानों ने समर्थकों में जोश भरा, वहीं सियासी गलियारों में नई बहस भी छेड़ दी।
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