Last updated: January 26th, 2026 at 09:56 am
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर पुष्कर सिंह धामी सरकार को बड़ी सफलता मिली है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने यूसीसी अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता अब कुछ संशोधित और सख्त प्रावधानों के साथ प्रभावी हो गई है। सरकार की योजना आगामी फरवरी-मार्च में प्रस्तावित बजट सत्र के दौरान इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में विधानसभा से पारित कराने की है, ताकि इसे स्थायी कानून का रूप दिया जा सके।
तकनीकी खामियों के चलते लौटा था विधेयक
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान यूसीसी संशोधन विधेयक पारित किया गया था। हालांकि, ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी कमियों के कारण राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए सरकार को वापस भेज दिया था। इसके बाद सरकार ने आवश्यक संशोधन कर इसे अध्यादेश के रूप में दोबारा प्रस्तुत किया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
आजादी के बाद यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य
उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। फरवरी 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी लागू करने का वादा किया था। चुनाव में दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद 27 मई 2022 को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।
समिति की सिफारिशों के आधार पर 8 फरवरी 2024 को राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया गया। इसके बाद 8 मार्च को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। नियमावली तैयार होने के पश्चात 27 जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी को विधिवत लागू कर दिया गया।
यूसीसी के प्रमुख प्रावधान
समान नागरिक संहिता के तहत कई महत्वपूर्ण और सख्त प्रावधान किए गए हैं। पहचान छिपाकर विवाह करने या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को दंडनीय अपराध माना गया है, जिसमें जेल की सजा तक का प्रावधान है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को कानूनी मान्यता दी गई है और उन्हें संपत्ति में अधिकार मिलेगा। इसके साथ ही विवाह का पंजीकरण सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। सभी धर्मों में विवाह और तलाक के लिए समान नियम लागू होंगे, हालांकि जनजातीय समुदायों को इसमें कुछ छूट दी गई है।
यूसीसी के तहत विवाह की न्यूनतम आयु भी तय की गई है। युवक के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और युवती के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज में समानता, पारदर्शिता और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना है। राज्य में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
![]()
Comments are off for this post.