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शिक्षकों के इलाज की चिंता खत्म: योगी सरकार का बड़ा कैबिनेट फैसला

प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोगों को एक ऐसी राहत दी है, जिसका इंतजार वर्षों से किया
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प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोगों को एक ऐसी राहत दी है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था। शिक्षक दिवस पर की गई घोषणा अब जमीन पर उतरती दिख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

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    शिक्षक और परिवार की सुरक्षा की ओर बड़ा कदम

    अब तक सरकारी कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई तरह की सीमाएं थीं। इलाज के लिए लंबी प्रक्रियाएं, निजी अस्पतालों में भारी खर्च और बाद में भुगतान की अनिश्चितता शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बनती थी। इस नई व्यवस्था के बाद इलाज के समय पैसों की चिंता नहीं रहेगी। शिक्षक और उनके परिवार सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों में जाकर कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

    माध्यमिक शिक्षा से जुड़े लाखों लोग होंगे लाभान्वित

    इस फैसले से माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक और मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञ लाभान्वित होंगे। सरकार के अनुसार इस श्रेणी में लगभग 2.97 लाख से अधिक लोग इस सुविधा के दायरे में आएंगे, जिस पर करीब 89 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च अनुमानित है।

    बेसिक शिक्षा परिषद के कर्मियों को भी बड़ी राहत

    बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डेन, पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षक तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइये भी इस योजना में शामिल किए गए हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री के अनुसार इस योजना से करीब 11.95 लाख से अधिक कर्मी और उनके आश्रित लाभ उठाएंगे। इस पर सरकार को हर साल लगभग 358 करोड़ रुपये का व्यय करना होगा।

    सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस सुविधा

    यह सुविधा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं होगी। योजना के तहत साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की व्यवस्था होगी। इलाज की दरें आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी, जिससे इलाज की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे।

    वेरिफिकेशन और पात्रता की व्यवस्था

    स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को योजना का लाभ वेरिफिकेशन के बाद मिलेगा। इसके लिए हर जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि जो लोग पहले से किसी अन्य केंद्र या राज्य की स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत आच्छादित हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।

    सम्मान और सुरक्षा का संदेश

    यह फैसला सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि उन शिक्षकों के सम्मान का संदेश है जो समाज की नींव मजबूत करने में अपनी पूरी जिंदगी लगा देते हैं। इलाज जैसी बुनियादी जरूरत पर सरकार की यह पहल न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा देगी, बल्कि शिक्षकों में भरोसा और आत्मसम्मान भी बढ़ाएगी।

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