
ग्रेटर नोएडा से जुड़ा एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है, जिसमें महिला सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर नीतू बिष्ट के साथ कथित तौर पर पीछा करने और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया गया. यह घटना दिल्ली के डीएनडी फ्लाईओवर से ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक के सफर से जुड़ी बताई जा रही है. नीतू बिष्ट के सोशल मीडिया पर करीब 50 लाख फॉलोअर्स हैं, ऐसे में मामला सामने आते ही तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच चिंता और बहस का विषय बन गया.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
घटना उस समय की है जब नीतू बिष्ट अपनी बीएमडब्ल्यू कार से दिल्ली से ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर लौट रही थीं. आरोप है कि डीएनडी फ्लाईओवर के पास एक दूसरी कार में सवार कुछ युवकों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया. यह सिलसिला नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक जारी रहा. रास्ते में युवकों ने कई बार कार को ओवरटेक करने की कोशिश की और कथित तौर पर अभद्र इशारे भी किए.
डर और घबराहट में किया फोन
लगातार पीछा किए जाने से नीतू काफी घबरा गईं. बताया गया कि उनका घर अभी करीब 15 मिनट दूर था, लेकिन इस दौरान डर का माहौल बना रहा. घबराहट में नीतू ने अपने पति लखन को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी. पति ने बिना देर किए मौके पर पहुंचने का फैसला किया और साथ ही पुलिस को भी सूचना दी.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही थाना नॉलेज पार्क की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत की और स्थिति को संभाला. हालांकि, महिला की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई. लखन के अनुसार, पुलिस आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए तैयार थी, लेकिन उन्होंने और नीतू ने युवकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कानूनी कार्रवाई न करने की इच्छा जताई.
समझौते के बाद मामला शांत
पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को बुलाया और उनसे लिखित माफी भरवाई. साथ ही युवकों को सख्त हिदायत देकर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. इसके बाद मामला वहीं शांत हो गया. बाद में गौतमबुद्धनगर पुलिस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि सोशल मीडिया पर 27 किलोमीटर तक पीछा किए जाने का दावा भ्रामक था. पुलिस के अनुसार यह घटना करीब एक महीने पहले हुई थी और उसी समय इसका निपटारा कर दिया गया था.
परिवार ने जताया आभार
घटना के बाद लखन ने एक और वीडियो जारी कर नोएडा पुलिस और थाना नॉलेज पार्क की तारीफ की. उन्होंने कहा कि पुलिस ने बेहद संवेदनशीलता और तेजी से काम किया. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि इस पुराने मामले को जानबूझकर दोबारा वायरल किया जा रहा है, जिससे गलतफहमी फैल रही है.
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हर जानकारी को बिना जांचे परखे सच मान लेना कितना खतरनाक हो सकता है. साथ ही यह भी दिखाता है कि समय पर पुलिस की कार्रवाई कई बार बड़े विवाद को शांत कर सकती है.
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