Last updated: January 30th, 2026 at 12:14 pm
देहरादून। चारधाम यात्रा से पहले बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने दोनों प्रमुख धामों में नियमों को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित नियमों के तहत मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही ब्लॉगिंग, वीडियोग्राफी और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर परिसर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है। हाल के वर्षों में मंदिरों के भीतर रील, वीडियो और ब्लॉगिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए समिति ने नए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।
तय होगी मंदिर परिसर की सीमा, वहीं से होगी सख्ती
समिति के अनुसार बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में एक सीमा रेखा (बॉर्डर लाइन) निर्धारित की जाएगी। इस सीमा के अंदर मोबाइल फोन का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई श्रद्धालु या व्यक्ति इस क्षेत्र में फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया, तो उसका मोबाइल जब्त किया जा सकता है और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
लॉकर सुविधा की होगी व्यवस्था
मोबाइल और अन्य सामान रखने के लिए मंदिर परिसर के बाहर लॉकर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि लॉकर का स्थान और शुल्क अभी तय नहीं किया गया है। इस संबंध में मंदिर समिति की आगामी बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
बिना अनुमति ब्लॉगिंग पर रोक
नए नियम लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति फोटो, वीडियो या ब्लॉगिंग नहीं कर सकेगा। यदि किसी को कंटेंट बनाना है, तो उसे BKTC या संबंधित जिलाधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
गैर-हिंदुओं की एंट्री पर भी विचार
मंदिर समिति के स्तर पर यह प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है कि बद्रीनाथ, केदारनाथ समेत BKTC के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट
इस वर्ष बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले खोले जाएंगे। समिति के अनुसार 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे थे श्रद्धालु
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के यात्रा सीजन में बद्रीनाथ धाम में 16.52 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। बढ़ती भीड़ और अनुशासन बनाए रखने के लिए ही समिति अब नियमों को और सख्त करने की दिशा में कदम उठा रही है।
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