Last updated: February 2nd, 2026 at 06:36 am

उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अब केवल योजनाएं नहीं, बल्कि उनके नतीजे भी जमीन पर दिखने चाहिए। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क निधि प्रबंधन समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण, रखरखाव और यातायात व्यवस्था से जुड़े कई अहम निर्देश दिए, जिनका सीधा असर आम जनता की सुरक्षा और सुविधा पर पड़ेगा।
परियोजनाओं में देरी नहीं, परिणाम दिखना जरूरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए और उसका लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए। पुराने और लंबित कार्यों पर विशेष नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि विकास की राह में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास, निवेश और औद्योगिक विस्तार की रीढ़ हैं।
ओवरलोड वाहनों पर सख्ती, सड़क सुरक्षा सर्वोपरि
बैठक में सड़क हादसों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने ओवरलोड ट्रकों और डंपरों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में डालती है। इसके साथ ही भारी वाहनों के चालकों की नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करने को कहा गया, ताकि थकान और असावधानी से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
सड़क निर्माण में गुणवत्ता और तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में सुरक्षा मानकों के सख्त पालन के निर्देश दिए। उन्होंने नई तकनीक अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, जिनमें लागत कम हो लेकिन सड़कों की उम्र ज्यादा हो। गुणवत्ता से समझौता किए बिना टिकाऊ निर्माण को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
वार्षिक कार्ययोजना समय पर तैयार करने के निर्देश
वर्ष 2025 26 की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हर साल अप्रैल के अंत तक वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर उसे स्वीकृत कराया जाए। उन्होंने कहा कि बजट का हेड वाइज आवंटन शुरुआत में ही तय होना चाहिए, ताकि बाद में संशोधन के कारण विकास कार्य प्रभावित न हों। समय पर योजना और वित्तीय स्पष्टता से ही तेज विकास संभव है।
नियमित समीक्षा और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने समिति की बैठकें हर वित्तीय वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की नियमित समीक्षा हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण से जुड़े प्रस्ताव केवल जनप्रतिनिधियों से ही लिए जाएं, जिससे योजनाएं जमीनी जरूरतों के अनुरूप हों। पार्किंग व्यवस्था, सड़क सुरक्षा जागरूकता और स्थानीय निकायों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा जताया कि यदि सभी विभाग ईमानदारी और समयबद्ध तरीके से काम करें, तो वित्तीय वर्ष 2025 26 में उत्तर प्रदेश की सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। यह पहल न केवल सड़कों की हालत सुधारेगी, बल्कि प्रदेश को विकास की नई रफ्तार भी देगी।
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