Last updated: February 7th, 2026 at 11:31 am

उत्तराखंड की अल्मोड़ा जिला कारागार एक बार फिर व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि यहां कुछ प्रभावशाली और कुख्यात कैदियों के लिए जेल नियम महज कागज़ी साबित हो रहे हैं। जेल के भीतर धनबल और बाहुबल के दम पर विशेष सुविधाएं मिलने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही कोई नामचीन अपराधी या रसूखदार व्यक्ति जेल में पहुंचता है, उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और प्रभाव के आधार पर उसे अलग तरह की सुविधाएं मिलने लगती हैं। जेल में बंद अन्य कैदियों के मुकाबले ऐसे बंदियों को काम से छूट, बेहतर आवास और मनपसंद भोजन तक उपलब्ध कराया जाता है।
188 कैदियों वाली जेल, लेकिन व्यवस्था अलग-अलग
वर्तमान में अल्मोड़ा जेल में कुल 188 कैदी निरुद्ध हैं। आम तौर पर जेल शांत मानी जाती है, लेकिन जब कोई गैंगस्टर, बाहुबली या प्रभावशाली शख्स यहां पहुंचता है, तो जेल की अंदरूनी तस्वीर बदल जाती है। सूत्रों का दावा है कि जितना बड़ा अपराधी, उतना ही ऊंचा उसका ‘रुतबा’ तय हो जाता है। ऐसे कैदियों को अलग बैरक में रखा जाता है और उन्हें सफाई, रसोई व अन्य श्रम कार्यों से मुक्त कर दिया जाता है। उनके लिए भोजन भी बैरक तक पहुंचाया जाता है, जबकि सामान्य कैदियों को ये सभी काम अनिवार्य रूप से करने होते हैं।
‘सेवक’ बनते हैं छोटे अपराधों में बंद कैदी
जेल के भीतर कुछ कैदी ऐसे भी होते हैं, जिन्हें प्रभावशाली बंदियों की सेवा में लगा दिया जाता है। ये कैदी उनके कपड़े धोने से लेकर बर्तन साफ करने और अन्य निजी कामों तक को अंजाम देते हैं। बदले में उन्हें भी कुछ रियायतें मिलने की बात कही जा रही है।
बाहर से पहुंचता है पैसा और सामान
सूत्र बताते हैं कि जेल के बाहर मौजूद गिरोह के सदस्य समय-समय पर अपने साथियों के लिए धन और कीमती सामान की व्यवस्था करते हैं। मुलाकात के दौरान कपड़े, जूते और नकदी जेल तक पहुंचाई जाती है, जिससे जेल के भीतर ‘विशेष प्रबंध’ बनाए रखे जा सकें।
बैरक राइटर की अहम भूमिका
जेल की हर बैरक में एक ‘राइटर’ नियुक्त होता है, जो वहां की गतिविधियों पर नजर रखता है। आरोप है कि यही राइटर कैदियों से सुविधाओं के बदले शुल्क वसूलने में अहम भूमिका निभाता है। बताया जा रहा है कि इस वसूली का एक हिस्सा जेल स्टाफ और अन्य स्तरों तक भी पहुंचता है।
सवालों के घेरे में जेल प्रशासन
इन आरोपों के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि दावे सही हैं, तो यह न केवल जेल मैनुअल का उल्लंघन है, बल्कि कानून व्यवस्था और सुधार की मूल भावना पर भी सीधा प्रहार है।
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