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साइबर ठगों के खिलाफ देहरादून पुलिस का सुरक्षा कवच, वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचेगी ‘डिजिटल अरेस्ट’ की चेतावनी

देहरादून। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए देहरादून पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष
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देहरादून। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए देहरादून पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों को डराकर उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी लूटने वाले साइबर ठगों के खिलाफ अब पुलिस सीधे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाएगी।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने सीनियर सिटीजन सेल और सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में अकेले रह रहे प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जाए। उन्हें फोन कॉल और प्रत्यक्ष मुलाकात के जरिए बताया जाएगा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और इस तरह के कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

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    जनवरी में ही सामने आए 18 डिजिटल अरेस्ट के मामले

    पुलिस के मुताबिक वर्ष 2026 की शुरुआत में ही डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 18 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब 80 प्रतिशत पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं, जो या तो अकेले रहते हैं या तकनीकी जानकारी सीमित होने के कारण साइबर अपराधियों के झांसे में आ जाते हैं। साइबर ठग खुद को क्राइम ब्रांच, सीबीआई, पुलिस या टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर बुजुर्गों को डराते हैं और कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।

    जिले में 453 वरिष्ठ नागरिक अकेले रह रहे

    देहरादून जिले में वर्तमान में 453 ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जो अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कई मामलों में उनके बच्चे शहर या देश से बाहर रहते हैं। पुलिस का सीनियर सिटीजन सेल इन सभी बुजुर्गों से फोन के माध्यम से संपर्क कर रहा है और उन्हें साइबर ठगी के तरीकों, फर्जी कॉल की पहचान और बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही थाना स्तर पर पुलिसकर्मी घर-घर जाकर बुजुर्गों को जागरूक करेंगे और उन्हें थाने व कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी भी संदिग्ध कॉल या आपात स्थिति में तुरंत मदद ली जा सके।

    ठगी के बाद तनाव में गए बुजुर्ग, लाखों की रकम गंवाई

    मामला 1:
    सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में रहने वाले एक वरिष्ठ नागरिक को क्राइम ब्रांच मुंबई का अधिकारी बताकर कॉल किया गया। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई और छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर करीब 12.80 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।

    मामला 2:
    रायपुर क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग को पहले बीएसएनएल कर्मचारी और फिर मुंबई क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर फोन किया गया। आरोपियों ने 15 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा और करीब 68 लाख रुपये की ठगी कर ली।

    पुलिस की अपील

    देहरादून पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिजनों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की बात नहीं करती। संदेह होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

     

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