Last updated: February 10th, 2026 at 06:59 am

नैनीताल न्यूज। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्माणाधीन कैंची धाम बाईपास को 15 जून 2026 से पहले शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसके शुरू होने से भवाली और आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से काफी हद तक निजात मिलेगी। हालांकि, शिप्रा नदी पर प्रस्तावित 74 मीटर लंबे स्थायी पुल का निर्माण पर्यटन सीजन से पहले पूरा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बैली ब्रिज बनाने का फैसला लिया है, ताकि यातायात बाधित न हो।
भीमताल में हुई योजना की समीक्षा
सोमवार को भीमताल पहुंचे लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज ने कैंची धाम बाईपास परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। विकास भवन में आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्य, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि कैंची धाम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में यहां पहुंचने का मार्ग सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होना चाहिए।
18.2 किलोमीटर लंबा है बाईपास
कैंची धाम बाईपास परियोजना की कुल लंबाई 18.2 किलोमीटर है। यह मार्ग भवाली सेनिटोरियम से शुरू होकर रातीघाट होते हुए पाडली तक विकसित किया जा रहा है। परियोजना के दो चरणों में अब तक अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण के तहत 10.22 किलोमीटर क्षेत्र में पहाड़ कटान का कार्य पूरा किया जा चुका है। अब पुल निर्माण और अन्य तकनीकी कार्य शेष हैं। यदि समय रहते बैली ब्रिज तैयार हो जाता है, तो पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
12.58 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
इस दौरान सतपाल महाराज ने 1258.12 लाख रुपये की लागत वाली पांच विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।
15 जून को लगता है कैंची धाम मेला
गौरतलब है कि हर वर्ष 15 जून को कैंची धाम में विशाल मेला आयोजित होता है। इस अवसर पर भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें एक से दो लाख श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बाबा नीब करौरी महाराज ने 15 जून 1964 को धाम की प्रतिष्ठा का दिन निर्धारित किया था। इसी दिन हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी।
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