Last updated: February 12th, 2026 at 07:35 am

देहरादून। उत्तराखंड के धौलास क्षेत्र में हुए भूमि आवंटन को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण की गहन जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता, तुष्टीकरण या साजिश को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि भूमि आवंटन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले को लेकर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वर्ष 2004 में कांग्रेस शासनकाल के दौरान एक संस्था को भूमि आवंटित की गई थी, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं। धर्मपुर क्षेत्र से विधायक एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्र में भूमि आवंटन को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है और सरकार को पूरी सच्चाई सामने लानी चाहिए। भाजपा ने यह भी कहा कि प्रदेश की सुरक्षा, जनसांख्यिकी संतुलन और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है और कहा है कि मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। इधर, विवादित भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि वे संभावित धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को भरोसा दिलाया है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो पीड़ितों के हितों की रक्षा की जाएगी। धौलास भूमि प्रकरण अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आवंटन प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। फिलहाल प्रदेश की नजरें सरकार की कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
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