Last updated: February 16th, 2026 at 02:04 pm

देहरादून न्यूज/ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ व्यापक संगठनात्मक रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी विशेष रूप से उन 23 विधानसभा सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पिछली बार उसे हार का सामना करना पड़ा था।
हारी सीटों पर विशेष अभियान
सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने इन सीटों पर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का खाका तैयार किया है। बूथ लेवल एजेंट-द्वितीय (बीएलए-टू) की नियुक्ति का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष नियुक्तियां एक महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। बीएलए-टू की जिम्मेदारी मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और नए मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित करने की होगी। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ प्रबंधन ही जीत की कुंजी है।
पिछले चुनावों का गणित
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 57 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 2022 में पार्टी ने दोबारा बहुमत हासिल किया, लेकिन सीटों की संख्या घटकर 47 रह गई। अब पार्टी इस अंतर के कारणों का विश्लेषण कर रही है, ताकि अगले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि संगठन का पूरा ध्यान कमजोर बूथों और हारी हुई सीटों को मजबूत करने पर केंद्रित है। वरिष्ठ नेताओं के प्रवास कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं, ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़े।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सख्ती
इधर, सरकार में संभावित बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं पर पार्टी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में हुई प्रांतीय कोर कमेटी की बैठक में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिना नाम लिए स्पष्ट संकेत दिए कि अनावश्यक चर्चाओं से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है और बदलाव की अटकलों का कोई आधार नहीं है। पार्टी का संदेश साफ है कि चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों पूरी एकजुटता के साथ काम करेंगे।
बूथ से चुनावी रण तक
भाजपा की रणनीति साफ है, बूथ स्तर पर मजबूती, कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा और हारी सीटों पर केंद्रित प्रयास। पार्टी मानती है कि यदि संगठनात्मक ढांचा मजबूत रहेगा, तो तीसरी बार सत्ता की राह आसान हो सकती है। आगामी चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में संगठनात्मक सक्रियता और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज रहने की संभावना है।
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