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सुप्रीम कोर्ट पहुँचा ग्रामीण चिकित्सकों का मामला: आर्श हेल्थ इंडिया फाउंडेशन ने दायर की जनहित याचिका

नई दिल्ली: 21 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट परिसर में उस समय एक अहम पहल देखने को
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नई दिल्ली: 21 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट परिसर में उस समय एक अहम पहल देखने को मिली जब Aarsh Health India Foundation – चिकित्सक मंच के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने देशभर के ग्रामीण चिकित्सकों के अधिकारों और कानूनी मान्यता के मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया पूरी की। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पदाधिकारियों ने बताया कि भारत के दूरदराज़ गांवों और पिछड़े इलाकों में वर्षों से लाखों प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हें अब तक स्पष्ट कानूनी पहचान, सेवा सुरक्षा और सरकारी संरक्षण प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण वे लगातार प्रशासनिक दबाव, अस्थिर रोजगार और शोषण जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं। मंच के चेयरमैन डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों और प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को देखते हुए इन चिकित्सकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई स्थानों पर यही चिकित्सक मरीजों के लिए पहली और कभी-कभी एकमात्र चिकित्सा सहायता साबित होते हैं। याचिका में मांग की गई है कि राज्य स्तर पर आधिकारिक रजिस्टर खोलकर सभी प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों का पंजीकरण किया जाए, ताकि उनकी योग्यता और पहचान को औपचारिक रूप से मान्यता मिल सके, साथ ही स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर उनके लिए निर्धारित पद सृजित कर नियोजन की व्यवस्था की जाए। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार देने का स्पष्ट कानूनी अधिकार, सेवा सुरक्षा की गारंटी, अनावश्यक उत्पीड़न पर रोक, तथा स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रशिक्षण प्राप्त सभी ग्रामीण चिकित्सकों को समान अवसर मिलना चाहिए और उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19(1)(g) और 21 प्रत्येक नागरिक को समानता, रोजगार के अवसर, पेशा चुनने की स्वतंत्रता और गरिमामय जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि यह पहल केवल चिकित्सकों के हित में नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गांवों में प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता, जवाबदेही और गुणवत्ता में सुधार संभव हो सकेगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश गौरव याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखेंगे और कानूनी रूप से यह स्थापित करने का प्रयास करेंगे कि प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों को व्यवस्था का हिस्सा बनाना जनहित में है। फाउंडेशन ने देशभर के ग्रामीण चिकित्सकों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस कानूनी संघर्ष का समर्थन करें, ताकि लंबे समय से लंबित मान्यता और सुरक्षा का मुद्दा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ सके और ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को एक स्थायी व व्यवस्थित ढांचा मिल सके।

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