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गौ रक्षा यात्रा के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, संतों पर दबाव बनाने का लगाया आरोप

उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य में चल रही गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा के दौरान ज्योतिष मठ बद्रिकाश्रम पीठ के शंकराचार्य
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उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य में चल रही गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा के दौरान ज्योतिष मठ बद्रिकाश्रम पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई राजनीतिक दल चाहते हैं कि संत और शंकराचार्य उनके विचारों का समर्थन करें और उनके सुर में सुर मिलाएं। अगर ऐसा नहीं होता, तो उनकी मान मर्यादा को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

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    मंगलवार सुबह जगन्नाथ मंदिर में यात्रा के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि गौमाता की रक्षा के संकल्प के साथ निकाली जा रही है। उनका कहना था कि अब देश की जनता मानसिक रूप से तैयार हो चुकी है और वह किसी भी हालत में गौमाता की हत्या को स्वीकार नहीं करेगी।

    गौ रक्षा को बताया यात्रा का मुख्य संकल्प

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में गौ रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता का विशेष स्थान है और सदियों से इसे सम्मान और संरक्षण दिया जाता रहा है। उनका मानना है कि समय के साथ यह विषय केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा बन चुका है।उन्होंने कहा कि जब समाज इस मुद्दे पर जागरूक होगा, तभी गौ हत्या जैसे मामलों को रोकने में वास्तविक सफलता मिल पाएगी। इसी उद्देश्य से यह यात्रा अलग अलग स्थानों पर पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।

    संतों की चुप्पी पर जताई चिंता

    संतों की चुप्पी को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कई संत ऐसे हैं जो अपनी बात खुलकर कहना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण चुप रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे समझते हैं कि कई संत किसी दबाव या भय के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं, इसलिए वे उन्हें और कठिन स्थिति में नहीं डालना चाहते।उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज की गरिमा और परंपरा को बनाए रखना जरूरी है। अगर संतों की आवाज दबाई जाएगी, तो इसका असर समाज की आध्यात्मिक दिशा पर भी पड़ सकता है।

    राजनीति पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

    अपने संबोधन में उन्होंने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब संत सत्ता के अनुसार नहीं बोलते, तब उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए कई तरह की कोशिशें की जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार ऐसे लोगों को सामने लाया जाता है जिनका उद्देश्य केवल संतों की प्रतिष्ठा को कमजोर करना होता है।उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसे लोग भी इस मुहिम के खिलाफ खड़े हो जाते हैं जो पहले खुद गौ तस्करी जैसे मामलों में जेल जा चुके हैं। उनके अनुसार ऐसे लोगों को गौ रक्षा की इस पहल से परेशानी होना स्वाभाविक है।

    नैमिषारण्य से आगे बढ़ी यात्रा

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा सोमवार देर शाम नैमिषारण्य पहुंची थी। यहां उन्होंने ललिता देवी मंदिर में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। इसके बाद वे चक्र तीर्थ की अष्टकोणीय आरती में शामिल हुए। रात में उन्होंने परमार्थ धाम आश्रम में विश्राम किया।

    मंगलवार सुबह यात्रा के उद्देश्यों पर चर्चा के बाद यह यात्रा दधीचि कुंड मिश्रिख के लिए रवाना हो गई। इस यात्रा के माध्यम से वे देशभर में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दे रहे हैं।

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