Last updated: March 27th, 2026 at 08:45 am

कोलकाता से इस बार सियासत की जो तस्वीर सामने आ रही है, वो साफ बता रही है, यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि वर्चस्व की जंग है। और इस जंग में भाजपा ने अपने नए रणनीतिकार नितिन नवीन को मैदान में उतार दिया है, जो आते ही आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं।
बैकफुट नहीं, सीधे अटैक पर भाजपा
नितिन नवीन ने साफ कर दिया है कि यह चुनाव भाषणों या रैलियों से नहीं जीता जाएगा, बल्कि बूथ स्तर पर लड़कर जीता जाएगा। उनका फोकस एक-एक वोट, एक-एक बूथ पर है, यानी जमीनी लड़ाई को ही असली हथियार बनाया जा रहा है।
कोलकाता दौरा नहीं, रणनीतिक ऑपरेशन
24-25 मार्च का उनका कोलकाता दौरा एक सामान्य राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि एक ‘स्ट्रेटेजिक मिशन’ था। हावड़ा, हुगली और नवद्वीप जोन की बैठकों से लेकर जिला प्रभारियों और चुनाव संचालन टीम के साथ मैराथन मीटिंग्स ने यह साफ कर दिया कि भाजपा इस बार माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए चुनावी गेम बदलना चाहती है। नेताओं को साफ चेतावनी “काम करो या किनारा करो”
नितिन नवीन ने नेताओं को दो टूक शब्दों में संदेश दिया, यह कोई 9 से 5 की नौकरी नहीं है। अगर जमीन पर काम नहीं कर सकते, कार्यकर्ताओं के बीच नहीं रह सकते, तो जिम्मेदारी छोड़ दें। इस सख्त तेवर ने संगठन में साफ संकेत दे दिया है कि अब सिर्फ एक्टिव और रिजल्ट देने वाले ही टिक पाएंगे।
“बूथ जीतो, चुनाव जीतो” का बना मास्टर प्लान
नवद्वीप जोन की बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट मंत्र दिया, “बूथ जीतो, चुनाव अपने आप जीत जाओगे।”
यानी पूरी रणनीति अब बूथ लेवल कंट्रोल पर टिकी है, जहां हर कार्यकर्ता को खुद उम्मीदवार की तरह काम करने को कहा गया है।
तृणमूल बनाम भाजपा: डर बनाम भरोसे की लड़ाई
नितिन नवीन ने इस चुनाव को नया नैरेटिव दिया, तृणमूल का डर बनाम भाजपा का भरोसा। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि पूरी चुनावी रणनीति का केंद्र बन सकता है, जिससे वोटर्स के मनोविज्ञान पर सीधा असर डालने की कोशिश है।
“हर कार्यकर्ता ही उम्मीदवार” मनोबल हाई करने का फॉर्मूला
उन्होंने कार्यकर्ताओं को सिर्फ समर्थक नहीं, बल्कि चुनाव का असली खिलाड़ी बताया। “हर कार्यकर्ता खुद को उम्मीदवार माने” इस लाइन के साथ उन्होंने संगठन में ऊर्जा और जिम्मेदारी दोनों भरने की कोशिश की है।
बंगाल में अब सीधी टक्कर
नितिन नवीन की एंट्री के बाद यह साफ हो गया है कि भाजपा इस बार कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। बूथ से लेकर नैरेटिव तक हर स्तर पर आक्रामक रणनीति के साथ भाजपा ने बंगाल की लड़ाई को अब पूरी तरह हाई-वोल्टेज बना दिया है।
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