Last updated: April 2nd, 2026 at 09:38 am

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार और उन्हें डराने-धमकाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने इसे न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की गंभीर कोशिश बताया और राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्यकांत कर रहे थे, ने कहा कि सात न्यायिक अधिकारियों—जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं—को घंटों तक बिना सुरक्षा, खाने और पानी के रखा गया। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया। अदालत ने यह भी कहा कि पहले से जानकारी होने के बावजूद प्रशासन समय पर कार्रवाई करने में असफल रहा, जो उसकी बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
राज्य के अधिकारियों को नोटिस जारी
इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। कोर्ट ने पूछा है कि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई और अधिकारियों को इस स्थिति में क्यों छोड़ दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह घटना कानून के शासन पर सीधा हमला है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात करे। साथ ही कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और अधिकारियों को बिना किसी डर के अपना काम करने दिया जाए। कोर्ट ने सभी जगहों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश भी दिए।
अगली सुनवाई कब होगी?
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों को किसी प्रकार का खतरा है या नहीं, इसका तुरंत आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से उपस्थित होकर पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने साफ किया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव सख्त कदम उठाएगी।
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